डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की दिग्गज स्टील उत्पादक कंपनी टाटा स्टील ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। कंपनी ने वर्ष 2045 तक खुद को पूरी तरह ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन’ वाली कंपनी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए सर्कुलर इकोनॉमी, वॉटर मैनेजमेंट और बायोडायवर्सिटी को केंद्र में रखकर नई कार्ययोजना लागू की जा रही है।
कैंटीन में बायो-गैस से बनेगा खाना, फैक्टरी की गैस का होगा री-यूज
कंपनी ने न केवल अपने भारी उद्योगों में बल्कि रोजमर्रा के कामकाजी रूटीन में भी ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनानी शुरू कर दी है।
बायो-गैस और CO2 री-यूज़: जमशेदपुर स्थित प्लांट की कैंटीनों में अब रसोई गैस की निर्भरता कम की जा रही है। ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस को रिकवर कर कैंटीन में कुशल ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
कार्बन कटौतियां: इस तकनीक से पारंपरिक ईंधन की खपत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी।
कार्बन एमिशन में भारी कटौती का रोडमैप
क्लाइमेट चेंज की रणनीति के तहत टाटा स्टील ने चरणबद्ध तरीके से उत्सर्जन घटाने की तैयारी की है।
2030-31 तक 15% तक कटौती: वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में 10 से 15% की कमी लाने का लक्ष्य है।
अंतरराष्ट्रीय प्लांटों में बड़ा बदलाव: नीदरलैंड्स स्थित ईजमुइडेन प्लांट में CO2 उत्सर्जन में 43% की कटौती का लक्ष्य है, वहीं ब्रिटेन में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के जरिए स्क्रैप-आधारित उत्पादन से 90% तक CO2 उत्सर्जन कम किया जाएगा।
ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज और स्क्रैप रीसाइक्लिंग पर ज़ोर
स्क्रैप रीसाइक्लिंग नेटवर्क: कंपनी स्क्रैप आधारित स्टील निर्माण को बढ़ावा दे रही है। लुधियाना स्थित ईएएफ प्लांट की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वित्त वर्ष 2026-27 तक उत्तर भारत में 1 मीट्रिक टन और 2030-31 तक भारत भर में 3 मीट्रिक टन स्क्रैप जुटाने का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा।
वॉटर मैनेजमेंट और डस्ट कंट्रोल: वित्त वर्ष 2026-27 तक टाटा स्टील के सभी भारतीय इस्पात संयंत्र ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज का दर्जा हासिल कर लेंगे। यानी कारखानों से एक बूंद भी गंदा पानी बाहर नहीं बहेगा।
जल खपत घटाने का लक्ष्य: वित्त वर्ष 2030-31 तक जल खपत को घटाकर 1.1 EM3 प्रति टन क्रूड स्टील करने का लक्ष्य तय किया गया है।
100% बायोडायवर्सिटी असेसमेंट और ग्रीन रेटिंग
पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 तक अपने सभी प्लांटों के लिए बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान लागू करेगी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 से 80% से अधिक फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का लाइफ साइकिल असेसमेंट किया जाएगा, और वित्त वर्ष 2030-31 तक कंपनी के 100% उत्पादों की एनवायरनमेंट परफॉर्मेंस की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

