डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में भाकपा (माओवादी) के आखिरी बचे गढ़ भी अब पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर हैं। सुरक्षा बलों की सख्त नाकेबंदी और लगातार चलाए जा रहे अभियानों से पस्त होकर 5 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर कायम ने दो महिला माओवादियों के साथ पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। सारंडा को माओवाद मुक्त कराने के बाद पुलिस इसे लाल आतंक के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक कामयाबी के रूप में देख रही है।
मिसिर बेसरा का दाहिना हाथ था सालुका
पुलिस फाइलों (कांड संख्या 30/2023) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक सोनुवा क्षेत्र के कुदाबुरू कायमसाई का रहने वाला सालुका कायम संगठन की साउथजोन सेंट्रल कमेटी का प्रमुख चेहरा था। शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का अति-विश्वस्त सहयोगी होने के कारण कोल्हान के जंगलों में उसकी गहरी पकड़ थी। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से ही सुरक्षा बलों का शिकंजा सालुका पर कसता जा रहा था, जिससे तंग आकर आखिरकार उसने अपनी दो महिला सहयोगियों के साथ पुलिस की शरण लेना ही बेहतर समझा।
बैकफुट पर नेटवर्क, बंगाल भाग रहे बड़े कैडर
हाल के महीनों में पुलिस मुख्यालय रांची में 14 माओवादियों के एकमुश्त आत्मसमर्पण और सरायकेला के चांडिल से असीम मंडल दस्ता के रवि सरदार समेत तीन कैडरों की गिरफ्तारी ने लाल लड़ाकों की कमर तोड़ दी थी। सूत्रों का दावा है कि सालुका के सरेंडर के साथ ही कोल्हान क्षेत्र से माओवादियों का जमीनी कैडर नेटवर्क लगभग पूरी तरह सफाया हो चुका है। पुलिस के बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि 1 करोड़ रुपये का इनामी एक शीर्ष माओवादी नेता अब झारखंड से जान बचाकर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के जंगलों में शरण लेने को मजबूर हुआ है।
आधिकारिक घोषणा और प्रेस वार्ता का इंतजार
सुरक्षा कारणों और प्राथमिक पूछताछ की प्रक्रियाओं के चलते पश्चिमी सिंहभूम पुलिस ने फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जिला पुलिस जल्द ही एक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर तीनों माओवादियों के सरेंडर, उनके द्वारा किए गए खुलासों और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेगी।

