बिहार EOU का बड़ा शिकंजा NEET धांधली मामले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 2 मेडिकल छात्रों समेत 3 पकड़े गए

Reena Sharma
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​बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने NEET और Re-NEET परीक्षा धांधली मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। EOU की विशेष कार्रवाई में गिरोह के मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके साथी डॉ. उज्जवल राज और उसके सगे भाई अश्विनी कुमार को पटना से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस दौरान छापेमारी में भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, खाली कॉपियां और नकदी बरामद हुई है।
​परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तारी और लाखों की नकदी बरामद
​EOU ने सबसे पहले कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉ. उज्जवल राज को पटना स्थित आर्यभट ज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा केंद्र के बाहर से दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से एक स्कॉर्पियो गाड़ी और ₹2.95 लाख कैश बरामद किया गया।
​उज्जवल राज की गिरफ्तारी से मिली जानकारियों के आधार पर 12 अगस्त को Re-NEET धांधली के मुख्य मास्टरमाइंड डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को गिरफ्तार किया गया। रविशंकर पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में MBBS फाइनल ईयर का छात्र है और पटना के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर का रहने वाला है।
​स्कॉलर बैठाने से लेकर रेलवे भर्ती तक में रहा है शामिल
​जांच के अनुसार, डॉ. रविशंकर प्रतियोगी परीक्षाओं में असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी ‘स्कॉलर’ (सोल्वर) बैठाने और दस्तावेजों में हेरफेर करने का नेटवर्क चलाता था। EOU की रिपोर्ट के मुताबिक, रविशंकर का आपराधिक रिकॉर्ड पुराना है और वह इससे पहले रेलवे की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मामले में भी जेल जा चुका है।
​मामले में गिरफ्तार तीसरा आरोपी अश्विनी कुमार, रविशंकर का सगा भाई है। अश्विनी पेशे से एक निजी कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव का काम करता था और इस फर्जीवाड़े में नए अभ्यर्थियों (क्लाइंट्स) को ढूंढकर लाने का काम संभालता था।
​छापेमारी में मिले फर्जी आय, जाति व दिव्यांगता प्रमाणपत्र
​मुख्य आरोपी की निशानदेही पर EOU ने पटना के रामकृष्ण नगर स्थित उसके भाई के फ्लैट और एक किराए के मकान में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
बरामदगी की मुख्य वस्तुएं:
• ​MBBS परीक्षा की खाली उत्तर पुस्तिकाएं (कॉपियां)
• ​NEET, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग और CBSE के कई प्रवेश पत्र (Admit Cards)
• ​फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता (Disability) प्रमाणपत्र
​EOU अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किन-किन अभ्यर्थियों ने किया है और इनके जरिए किन मेडिकल कॉलेजों में फर्जी तरीके से एडमिशन हासिल करने की कोशिश की गई थी। 

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