डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : कोलकाता के मशहूर पार्क स्ट्रीट में फुटपाथ पर बच्चे के लिए दूध गर्म करने के दौरान उठे राजनीतिक विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। पीड़ित महिला अपने बच्चे के साथ साल्टलेक स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री के जनता दरबार पहुंची, जहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने महिला से मुलाकात कर बच्चे को दुलारा और परिवार के लिए पक्के मकान का वादा किया। तृणमूल कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हमलों के बीच, भाजपा सरकार ने इस मामले में रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय सीधे राहत का दांव खेला है।
घटनाक्रम और सरकार का रुख
आवास और सुरक्षा का निर्देश: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम को महिला के परिवार के रहने के लिए तुरंत व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
फुटपाथ पर रहने का तर्क: मंत्री अग्निमित्रा पाल का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों और फुटपाथों पर रहने से दुर्घटना का खतरा रहता है। फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं, रहने की जगह नहीं।
ममता बनर्जी पर पलटवार: मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी लोगों को पैसे देकर भाजपा के खिलाफ बोलने के लिए उकसा रही हैं।
विपक्ष पर सवाल: उन्होंने वाममोर्चा के 34 साल और तृणमूल के 15 साल के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने दशकों के बाद भी फुटपाथ पर रहने वालों का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
विवाद की जड़ क्या है?
शनिवार को पार्क स्ट्रीट के व्यस्त फुटपाथ पर महिला के मिट्टी के तेल (केरोसिन) वाले चूल्हे पर दूध गर्म करने के दौरान शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल से उनकी तीखी बहस हो गई थी। इसका वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को गरीब विरोधी बताकर घेरा था। हालांकि, मंत्री ने सफाई दी कि उनकी चिंता व्यस्त सड़क पर चूल्हे के कारण होने वाले खतरे को लेकर थी, हालांकि उन्होंने माना कि वह अपनी बात थोड़े नरम लहजे में समझा सकती थी। दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए परिवार के रहने और बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की थी।
जनता दरबार में पहुंचे अन्य पीड़ित
मुख्यमंत्री के इस जनता दरबार में राज्य भर से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इनमें उत्तर 24 परगना से पंचायत स्तर पर नौकरी के नाम पर वसूली, दक्षिण 24 परगना से मंदिर में तोड़फोड़ की शिकायतें, ट्रक चालकों से पुलिस की अवैध वसूली और 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ता के परिजन शामिल थे।

