आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम हुए बेहद कड़े, अब हर सुधार के लिए लगेंगे अलग-अलग डॉक्युमेंट्स

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार कार्ड में नाम संशोधन की प्रक्रिया को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया लागू कर दी है। इस नए अपडेट के बाद अब आधार में नाम बदलना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। यूआईडीएआई ने साफ किया है कि नाम में किस तरह का बदलाव किया जा रहा है, उसके आधार पर अलग दस्तावेज और प्रक्रिया तय की गई है।

किस बदलाव के लिए कौन सा नियम और दस्तावेज जरूरी?
​सामान्य या मामूली बदलाव: स्पेलिंग ठीक करना, नाम का क्रम बदलना, इनिशियल को पूरा करना या मिडिल/सरनेम जोड़ना-हटाना इसके दायरे में आता है। इसके लिए वैध पहचान प्रमाण देना होगा।
​ऑपरेटर की गलती: अगर डेटा एंट्री के समय ऑपरेटर से कोई चूक हुई है, तो वयस्कों के लिए ‘अनुबंध-बी’ और नाबालिगों के लिए ‘अनुबंध-सी’ का शपथ पत्र देना अनिवार्य किया गया है।
​विवाह या तलाक के बाद बदलाव: शादी या तलाक के बाद नाम या सरनेम बदलने पर ‘अनुबंध-डी’ का शपथ पत्र और पहचान प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
​पूरा या बड़ा नाम बदलना: अगर कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम बदलना चाहता है, तो इसके लिए गजट अधिसूचना और पुराने नाम का फोटो पहचान प्रमाण देना जरूरी होगा। इसी तरह ‘उर्फ’ हटाने के लिए भी अलग प्रक्रिया और निर्धारित शपथ पत्र का नियम है।

जीवन में सिर्फ इतनी बार ही आसानी से बदल सकता है नाम
​UIDAI के नियमों के मुताबिक, कोई भी नागरिक सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने आधार कार्ड में केवल दो बार नाम अपडेट करवा सकता है। इसके बाद भी अगर बदलाव की आवश्यकता पड़ती है, तो विशेष अपवाद प्रक्रिया अपनानी होगी। इसके लिए आधार केंद्र पर अनुरोध देने के बाद 1947 या यूआईडीएआई के माध्यम से ‘एक्सेप्शन अपडेट’ का आवेदन करना पड़ता है, जिसमें बड़े बदलावों के लिए गजट नोटिफिकेशन जैसे कड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

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