डिजिटल डेस्क।मिरर मीडिया: झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभयारण्य के भीतर हो रहे पर्यटक कॉटेज के निर्माण को लेकर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने झारखंड सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक रिट याचिका के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
क्या है पूरा मामला और विवाद?
याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा ने दलमा अभयारण्य के मुकुलाकोचा और पिड्राबेड़ा क्षेत्र में बिना आवश्यक अनुमति के पर्यटक कॉटेज के निर्माण पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह निर्माण कार्य झारखंड सरकार के वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग की वित्तीय सहायता से कराया जा रहा है। आरोप है कि इस निर्माण के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की पूर्व अनुमति नहीं ली गई है और न ही वन संरक्षण कानून के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। वर्ष 2020 में तैयार दलमा अभयारण्य की स्वीकृत प्रबंधन योजना के अध्याय आठ में वर्णित इको-डेलवमेंट गतिविधियों या नए कॉटेज निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है।
समिति के निर्देश और आगे की कार्रवाई
CEC ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, झारखंड के अलावा वन विभाग और पर्यटन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को निर्माण से जुड़ी सभी स्वीकृतियों, वन भूमि की स्थिति, पेड़ों की कटाई, वित्तीय आवंटन और वैधानिक अनुमतियों का पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया है। सभी संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। आवेदक ने अवैध निर्माण को तुरंत रोकने, पहले से बने अवैध कॉटजेज को ध्वस्त करने और बिना पूर्व अनुमति के निर्माण कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। इस मामले में CEC की अगली और महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 12 अक्टूबर को होगी।

