दलमा अवैध निर्माण मामला: CEC ने वन व पर्यटन विभाग से मांगा जवाब, लटकी कार्रवाई की तलवार

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : दलमा वन्यजीव अभयारण्य में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए गेस्ट हाउस और कॉटेज निर्माण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने इस पूरे प्रकरण में गंभीर रुख अपनाते हुए वन और पर्यटन विभाग को कड़ी फटकार लगाई है और महज ढ़ाई सप्ताह के भीतर स्पष्ट जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा विवाद?
​मामला तब गरमाया जब यह बात सामने आई कि दलमा अभयारण्य में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की पूर्व अनिवार्य अनुमति लिए बिना ही गेस्ट हाउस और पर्यटक कॉटेज का निर्माण करा दिया गया। CEC की वर्चुअल सुनवाई में दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी समेत वन विभाग के कई अधिकारी शामिल हुए, जिनसे तीखे सवाल पूछे गए।

CEC की मुख्य आपत्तियां और सवाल
​प्रक्रिया की अनदेखी: CEC के चेयरमैन ने सुनवाई के दौरान कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब यह भली-भांति तय है कि सरकारी फंड का इस्तेमाल वन क्षेत्र में कैसे होना चाहिए और NBWL से मंजूरी लेने का क्या तय प्रोटोकॉल है, तो फिर इस प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया?
​प्रबंधन योजना का उल्लंघन: याचिकाकर्ता प्रतीक सिंह के अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने दलील दी कि साल 2020 में तैयार दलमा अभयारण्य की स्वीकृत प्रबंधन योजना के अध्याय-8 में इको-डेलवपमेंट गतिविधियों का उल्लेख तो है, लेकिन नए पर्यटक कॉटेज बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद मुकलाकोचा और पिड्राबेड़ा जैसे क्षेत्रों में नियमों के विरुद्ध कॉटेज खड़े किए जा रहे हैं।
​फंड और वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन: आरोप है कि वन विभाग की निष्क्रियता के बीच पर्यटन विभाग की वित्तीय सहायता से यह पूरा निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें वन संरक्षण अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण कानूनों की धज्जियां उड़ाई गई।

कार्रवाई की चेतावनी और आगे की राह
​सुनवाई के दौरान वन और पर्यटन विभाग की ओर से न तो कोई लिखित जवाब दाखिल किया गया और न ही कोई शपथ पत्र पेश किया गया। इसे CEC ने बेहद गंभीरता से लिया है। समिति ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए ढाई सप्ताह का अंतिम समय दिया है। अगर तय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब या हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो CEC बिना अनुमति निर्माण कार्य कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए सख्त कदम उठाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में वन और पर्यटन विभाग क्या सफाई पेश करता है।

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