डिजिटल डेस्क।मिरर मीडिया : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड में अवैध बालू खनन से शांखा नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। तिलाईटांड, झिमड़ी के करतालटांड और मुरू समेत आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बालू उठाव का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी क्षेत्र की जीवनरेखा रही नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है।
दिन-रात खनन, सैकड़ों ट्रैक्टरों से ढुलाई
ग्रामीणों के अनुसार, नदी से दिन-रात बालू का उठाव किया जा रहा है। आरोप है कि प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर बालू लेकर निकलते हैं। इसके बावजूद जिला खनन विभाग और नीमडीह अंचल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूछा कि बड़े पैमाने पर बालू का उठाव हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?
पर्यावरण के साथ राजस्व को भी नुकसान
अनियंत्रित खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना, जलप्रवाह और भूजल स्तर प्रभावित होने की आशंका है। इससे आसपास के पर्यावरण और नदी पर निर्भर ग्रामीणों की आजीविका पर भी संकट गहरा सकता है। वहीं, अवैध खनन से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मामले की जांच कर अवैध खनन व परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो शांखा नदी के संरक्षण के लिए व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

