डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : झारखंड सरकार के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के नए नियम को सरकार से स्वीकृति मिल गई है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में पढ़ने वाले हर विद्यार्थी का डिजिटल हेल्थ आईडी बनाया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करना और उन्हें आसानी से चिकित्सा, इमरजेंसी, काउंसलिंग व डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इस नई पहल की मुख्य बातें और प्रावधान
डिजिटल हेल्थ आईडी और ई-समर्थ पोर्टल: सभी विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर कराया जाएगा, जिससे उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इसके माध्यम से सिर्फ एक क्लिक में छात्र के स्वास्थ्य की पूरी जानकारी मिल जाएगी।
बजट का प्रावधान: सरकारी विश्वविद्यालयों के बजट का 51.29 करोड़ रुपये स्वास्थ्य व मानसिक कल्याण पर खर्च किया जाएगा।
स्वास्थ्य केंद्र और काउंसलर अनिवार्य: झारखंड के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्वास्थ्य केंद्र और काउंसलर होना अनिवार्य कर दिया गया है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में फुल-टाइम डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और काउंसलर उपलब्ध रहेंगे।
हॉस्टल वाले संस्थानों के लिए विशेष व्यवस्था: जिन शिक्षण संस्थानों में हॉस्टल की सुविधा है, वहां सिक रूम, 24 घंटे स्टाफ नर्स और एंबुलेंस सेवा अनिवार्य होगी।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर
विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति की अध्यक्षता में ‘यूनिवर्सिटी हेल्थ एंड वेलनेस काउंसिल’ और कॉलेज स्तर पर प्राचार्य की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। यह समिति स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सेवाओं की मॉनिटरिंग करेगी। हर सेमेस्टर में योग, ध्यान, कला, संगीत और नृत्य से संबंधित दो कार्यशालाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर सालाना तीन कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
ऑनलाइन सेवाएं और गोपनीयता: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अब ऑनलाइन काउंसलिंग, वीडियो-ऑडियो परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जरूरत के मुताबिक डिजिटल मदद देने की व्यवस्था रहेगी। साथ ही, विद्यार्थियों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और काउंसलिंग रिकॉर्ड की गोपनीयता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

