डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया:सेबी स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका को और अधिक प्रभावी व मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत नियामक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग संगठनों को एक मंच पर लाकर एक विशेष ‘क्षमता निर्माण नेटवर्क’ तैयार किया जाएगा।
स्वतंत्र निदेशकों के लिए नया नेटवर्क और परामर्श प्रक्रिया
बदलता दायरा: सेबी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अब स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका सिर्फ कागजी नियमों या अनुपालन तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ कंपनियों के दीर्घकालिक विकास में भी सक्रिय योगदान देना होगा।
उभरते क्षेत्रों की जानकारी: साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सस्टेनेबिलिटी और एचआर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता होना बेहद जरूरी है।
संतुलन और जवाबदेही: निदेशकों पर अनावश्यक दबाव न हो, इसके लिए सेबी जल्द ही एक परामर्श प्रक्रिया शुरू करेगा ताकि उनकी कार्यगत स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच सही संतुलन बनाया जा सके। हालांकि, गंभीर चूकों या कदाचार के मामलों में जवाबदेही तय करने में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
अनुपालन में राहत और बंगाल में निवेशकों का बूम
सरल प्रक्रिया: सेबी कंपनियों पर से कागजी अनुपालन का बोझ कम करने और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। हालांकि, संबंधित पक्षों के लेन-देन में किसी भी तरह की अनियमितता पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
90 लाख के पार निवेशक: पश्चिम बंगाल में निवेशकों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। साल 2015 के करीब 12 लाख की तुलना में अब यह आंकड़ा 90 लाख को पार कर गया है, जिनमें 36% से अधिक युवा (30 वर्ष से कम उम्र के) हैं। इसके अलावा, राज्य की कंपनियों ने आईपीओ के जरिए बाजार से अच्छी खासी पूंजी जुटाई है।
कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की वापसी की शर्ते
कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए सेबी ने कुछ कड़े और स्पष्ट मानक तय किए हैं। एक्सचेंज को सालाना कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार की क्षमता दिखानी होगी। आधुनिक ऑनलाइन ट्रेडिंग सिस्टम, मजबूत साइबर सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और क्लियरिंग-सेटलमेंट का पुख्ता ढांचा तैयार करना अनिवार्य होगा। पुरानी वित्तीय देनदारियों का निपटारा और पर्याप्त संख्या में निवेशकों व ट्रेडिंग सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी सीएसई के लिए बड़ी चुनौती होगी।

