डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। करीब दो दशक पुराने एक सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में केरल सरकार ने विजिलेंस जांच के सख्त आदेश दिए हैं। यह नया कानूनी संकट ऐसे समय में सामने आया है जब वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण और अन्य चुनावी फैसलों को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष पहले से ही CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
क्या है पूरा मामला और किसने लगाए आरोप?
यह पूरा विवाद करीब 20 साल पुराना है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव के पद पर तैनात थे। कोल्लम जिले के चदयामंगलम निवासी एक पूर्व ठेकेदार साजन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो के निदेशक के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता साजन का गंभीर आरोप है कि केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत पूरे किए गए कार्यों और लगभग 17 करोड़ रुपये के मंजूर बिलों के चेक जारी करने के एवज में ज्ञानेश कुमार ने 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार का यह भी दावा है कि रिश्वत की मांग पूरी न होने के कारण चेक जानबूझकर रोक दिए गए थे, जिससे मलेशियाई कंपनी ‘पीटीआई-बीईएल’, उससे जुड़े ठेकेदारों और कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक तंगी और संकट का सामना करना पड़ा था।
मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या और सुसाइड नोट का जिन्न बाहर
इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब ठेकेदार साजन ने मलेशियाई नागरिक व कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर ‘ली सी बीन’ की 2006 में हुई आत्महत्या का जिक्र किया। साजन के अनुसार, इंजीनियर ली ने अपने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार की भूमिका का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था। आरोप है कि बकाया भुगतान और लगातार मिल रहे मानसिक दबाव के चलते ली ने साल 2006 में अपनी जान दे दी थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उस दौर में हुई शुरुआती विजिलेंस जांच में कई अहम गवाहों, ली के परिवार और कंपनी के पूर्व कर्मचारियों से ठीक से पूछताछ नहीं की गई थी, जिसके कारण सबूतों के अभाव में मामला बंद कर दिया गया था। अब नए सिरे से इस पुराने फाईल को खोलकर गहराई से पड़ताल की मांग की गई है।
कानूनी सलाह के बाद विजिलेंस एक्शन, गृह मंत्रालय की अनुमति
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं की औपचारिक शिकायतों और कानूनी राय मिलने के बाद, राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्नथला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस को नए सिरे से विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, इन तमाम गंभीर और पुराने आरोपों पर अभी तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चुनावी नियुक्तियों और एसआईआर पर भी घिरे हैं CEC
एक तरफ जहां केरल के इस पुराने मामले ने तूल पकड़ लिया है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार चौतरफा घिरे हुए हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन लगातार वोटर लिस्ट और एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर आयोग पर पक्षपात और मनमानी के गंभीर आरोप लगा रहा है। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग के भीतर भी अन्य आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लगातार सुर्खियों और सवालों के घेरे में बनी हुई है।

