उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में पहलगाम आतंकी हमले पर वाड्रा की कथित टिप्पणी को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
यह याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के संयोजक कुलदीप तिवारी ने दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वाड्रा ने प्रिंट, लाइव न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर अपने कथित बयान में पूरे हिंदू समाज को आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया, जो न केवल असंवेदनशील है बल्कि देश की एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को भी चोट पहुंचाता है।
याचिका में लगाए गए कानूनी आरोप:
याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं का हवाला दिया है –
धारा 299: जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य कर किसी वर्ग के धर्म या विश्वास को अपमानित करना।
धारा 302: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने वाले शब्द या बयान देना।
धारा 152: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य करना।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
याचिकाकर्ता ने कहा कि हजरतगंज थाना में उन्होंने पहले से लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने डीजीपी उत्तर प्रदेश, लखनऊ पुलिस कमिश्नर और हजरतगंज थाने को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत की कॉपी भी भेजी, लेकिन फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जनहित याचिका पहले ही हाईकोर्ट में हो चुकी है खारिज
यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कुछ दिन पहले ही वाड्रा के बयान की SIT जांच कराने की मांग को लेकर दायर एक PIL खारिज करने के बाद सामने आई है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया था कि वो FIR या आपराधिक शिकायत जैसे वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाएं।

