डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: राजनीति में अक्सर लोग लग्जरी गाड़ियों और रसूख के साथ अपनी दावेदारी पेश करते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की सड़कों पर एक ऐसा शख्स दिखा जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 57 वर्षीय आलोक कुमार सिंह, जो बांकुड़ा के गंगाजलघाटी से अपने कंधे पर भारी-भरकम लकड़ी का हल टिकाए 225 किलोमीटर का सफर तय कर कोलकाता स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचे। उनका मकसद सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि बंगाल की ‘बंजर’ होती खेती की सूरत बदलना है।
तख्तियों पर दर्ज है ‘संकल्प’
आलोक के कंधे पर रखे हल पर दो तख्तियां लटकी थीं, जो उनके इरादों को साफ बयां कर रही थी। एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का कालजयी नारा ‘जय जवान, जय किसान’ लिखा था। दूसरी तरफ देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें थी।नीचे दर्ज थी उनकी दिली इच्छा-‘मैं प्रदेश का कृषि मंत्री बनकर भूखे-प्यासों को अन्न मुहैया कराना चाहता हूं’
जुनून के आगे छोटी पड़ी दूरी
बुधवार सुबह अपने घर से निकले आलोक ने दुर्गापुर तक का सफर तय किया और फिर ट्रेन के जरिए बिधाननगर पहुंचे। हल का वजन इतना है कि उसे लगातार कंधे पर रखना मुमकिन नहीं, इसलिए वह अपने साथ एक बांस का स्टैंड भी लेकर चलते हैं। जब भी थकते हैं, हल को स्टैंड पर टिकाकर सुस्ता लेते हैं, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगता।
जमीनी कार्यकर्ता की ‘ऊंची’ उड़ान
आलोक कोई नवागंतुक नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से भाजपा के सिपाही रहे हैं और दो बार पंचायत प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके पास अपनी चार बीघा जमीन है, लेकिन वह बांकुड़ा की उस बंजर मिट्टी की तकलीफ को समझते हैं जहां सिंचाई के अभाव में साल भर फसल नहीं लहलहाती।
मुलाकात अधूरी, पर उम्मीद पूरी
आलोक प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य से मिलने की आस लेकर आए थे, लेकिन अध्यक्ष दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ चुनावी बैठक में व्यस्त थे। हालांकि, आलोक निराश नहीं हुए। भाजपा पदाधिकारियों की सलाह पर उन्होंने अपना लिखित अनुरोध पत्र पार्टी के सोशल मीडिया सेल प्रमुख सप्तर्षि चौधरी को सौंप दिया है।

