लैंड फॉर जॉब घोटाले मामले में राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को दिल्ली की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों नेताओं की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने बचाव की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी।
हर दस्तावेज पाने का अधिकार नहीं
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में गैर-आश्रित दस्तावेज देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि हर दस्तावेज पाने का आरोपियों का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन पक्ष की ओर से सबूत पेश किया जाएगा, उसी आधार पर होगी सुनवाई। अदालत ने कहा कि बिना ठोस बचाव के आरोपियों को अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं।
अदालत की सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों को एक साथ उपलब्ध कराना न्यायिक प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर देगा। उन्होंने इसे “उलटी गंगा बहाने” जैसा बताते हुए कहा कि इससे मुकदमे को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया जाएगा।
मुकदमे को लंबा खींचने की कोशिश
अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपियों की यह मांग मुकदमे को लंबा खींचने की कोशिश है। जज ने अपने 35 पन्नों के आदेश में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर नियंत्रण अदालत का होता है और आरोपी जिरह के नाम पर इस पर कब्जा नहीं कर सकते। अदालत के अनुसार, इस तरह की शर्तें न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई और यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम कराई गई। इस मामले में 18 मई 2022 को केस दर्ज किया गया था। इसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, उनकी दो बेटियां और कई अन्य लोग आरोपी हैं। अदालत के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि मुकदमे की सुनवाई बिना किसी अतिरिक्त देरी के आगे बढ़ेगी। आरोपियों को तय प्रक्रिया के तहत ही अपनी दलीलें पेश करनी होंगी और अब ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिशों पर रोक लग गई है।

