मोन्था चक्रवात के कारण भारी बारिश और बाढ़ से बिहार के 12 जिलों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। बिहार सरकार से किसानों के नुकसान की भरपाई करने वाली है। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने ये बड़ी घोषणा की।

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि नई सरकार बनते ही किसानों को राहत देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के 12 जिलों में जिन किसानों की फसलें अक्टूबर में भारी बारिश, बाढ़ या मोखा चक्रवात की वजह से खराब हुई हैं, उन किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी किसानों की जमीन के प्रकार और गुणवत्ता के आधार पर तीन अलग-अलग दरों पर दी जाएगी।
2 दिसंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन
मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि फसल क्षति का सर्वेक्षण और आकलन पूरा हो चुका है और सरकार ने पात्र किसानों को शीघ्र ही इनपुट सब्सिडी जारी करने का निर्णय लिया है। यादव ने कहा, इन किसानों की फसल वाली भूमि को व्यापक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पात्र किसानों को 2 दिसंबर 2025 तक विभागीय वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
कितनी मिलेगी सब्सिडी
किसानों को उनकी फसल भूमि के प्रकार और गुणवत्ता के आधार पर तीन दरों पर कृषि इनपुट सब्सिडी के रूप में मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा। वर्षा आधारित असिंचित भूमि के लिए, अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि के लिए, किसानों को 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का भुगतान किया जाएगा। इसी प्रकार, सिंचित भूमि के लिए, अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बहु-फसलीय भूमि के लिए, जिसमें गन्ने की खेती के लिए भूमि उपयोग भी शामिल है, अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का भुगतान किया जाएगा।
छोटे और सीमांत किसानों को न्यूनतम सहायता
इसके अलावा, छोटे और सीमांत किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी भी दी जाएगी। ऐसे किसानों के लिए न्यूनतम देय दर असिंचित भूमि के लिए 1,000 रुपये, सिंचित भूमि के लिए 2,000 रुपये और बहु-फसलीय भूमि के लिए 2,500 रुपये है।
इन जिलों के किसान होंगे लाभान्वित
12 प्रभावित जिलों में बेगुसराय, पूर्वी चंपारण, कैमूर, मधुबनी, किशनगंज, गया, भोजपुर, मधेपुरा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, शिवहर और सुपौल शामिल हैं। मंत्री ने कहा, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को मुआवजा लाभ प्रदान करना सरकार की प्रतिबद्धता है।

