बिहार में विधानसभा चुनाव को नतीजे आए चार दिन हो गए हैं। इस बीच नई सरकार का गठन भी तेज हो गया है। हालांकि, एनडीए की बंपर जीत के बाद भी अगर बिहार में किसी बात की चर्चा हो रही है तो वो है लालू परिवार की। बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में महाभारत मची हुई है। इसी बीच सोमवार को पटना में राजद विधायक दल की बैठक हुई। इस सियासी बैठक में भी पारिवारिक झगड़े का असर देखा गया।

तेजस्वी ने ली हार की जिम्मेदारी
बैठक की शुरुआत में तेजस्वी यादव ने नेता पद की जिम्मेदारी संभालने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जनता ने अगर विकल्प के रूप में उन्हें स्वीकार नहीं किया तो नेतृत्व संभालना तर्क संगत नहीं होगा। उन्होंने राजद विधायकों से कहा कि वे किसी और को विधायक दल का नेता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।
नेता पद छोड़ने की पेशकश से चौंके विधायक
तेजस्वी के विधायक दल का नेता पद छोड़ने की पेशकश ने वहां मौजूद विधायकों को चौंका दिया और माहौल भारी हो गया। विधायकों के चेहरे पर तनाव दिखने लगे। कुछ देर के लिए पूरा कमरा बिल्कुल शांत हो गया। कई विधायक इस स्थिति से असहज महसूस करने लगे। सभी राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की ओर देखने लगे।
लालू की अपील पर माने तेजस्वी
इस दौरान पिता और पार्टी संरक्षक लालू प्रसाद यादव ने तुरंत हस्तक्षेप किया। लालू ने कहा कि उन्हें बिहार विधानसभा में पार्टी का नेतृत्व जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी तेजस्वी ने पार्टी का मनोबल बनाए रखा है। लालू यादव की इस अपील के बाद तेजस्वी ने थोड़े विचार-विमर्श के बाद नेतृत्व संभालने पर हामी भर दी।
संजय यादव को लेकर क्या बोले तेजस्वी?
तेजस्वी यादव ने इस बैठक में साफ कहा कि हार के लिए संजय यादव या उनकी टीम को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा, संजय यादव और उनकी टीम ने जमकर मेहनत की है। किसने कितना काम किया है, यह मुझे पता है। केवल किसी के बोल देने से वह दोषी नहीं हो जाते। तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में जब भी सुधार या अनुशासन लाने की कोशिश होती है, तब कुछ लोग विरोध शुरू कर देते हैं और यह विपक्षी पार्टियों के इशारे पर भी होता है।

