बिहार की राजनीति के सबसे बड़े कुनबे यानी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विदेश यात्रा से वापस लौटते ही राजद में एक बार फिर संगठनात्मक फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।

खबर है कि लंबी छुट्टी से लौटने के बाद तेजस्वी ‘एक्शन मोड’ में आने वाले हैं। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तेजस्वी ने अपनी डायरी में उन नामों की लिस्ट तैयार कर ली है, जिन पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तेजस्वी अपने पिता लालू प्रसाद यादव के पुराने करीबियों को किनारे कर संगठन में कोई बड़ी सर्जरी करने वाले हैं?
400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान
हाल के जिला और प्रमंडल स्तरीय बैठकों में यह बात सामने आई कि विधानसभा चुनाव के दौरान जिला-प्रखंड कमेटियां पूरी तरह सक्रिय नहीं रहीं और संगठन की जगह बाहरी एजेंसियों पर भरोसा करना पार्टी की हार की बड़ी वजह बनी। राजद ने विभिन्न स्तरों पर 400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान की है। जिला अध्यक्षों, प्रभारियों और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार की गई है। तेजस्वी पार्टी से खिलाफ काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं।
गिर सकती है मंगनी लाल मंडल पर गाज?
बिहार में राजद की हार के बाद सबसे अधिक चर्चा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की संभावित विदाई को लेकर हो रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव अब मंगनी लाल मंडल को पद से मुक्त कर सकते हैं।
संगठन का ढांचा दुरुस्त करने पर जोर
सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक करने वाले हैं, जिसमें आने वाले समय की रणनीति और संगठन की समीक्षा पर चर्चा होगी।तेजस्वी यादव अगले एक महीने में संगठन का ढांचा दुरुस्त करने पर जोर देंगे। इसके तहत 50 नए जिलाध्यक्ष और करीब 265 प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही, 14 जनवरी को राबड़ी आवास में होने वाले ‘चूड़ा-दही भोज’ पर भी निर्णय लिया जाएगा।

