बिहार में राज्यसभा की पांचवी सीट का किंगमेकर AIMIM, क्या आरजेडी के साथ बनेगी बात?

Reena Sharma
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बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए छह प्रत्याशियों के मैदान में उतर जाने के बाद मतदान होना तय है। बिहार में पांच सीटों में से 2 भारतीय जनता पार्टी और 2 जनता दल यूनाइटेड के खाते में जाना तय है। हालांकि पांचवी सीट पर पेच फंसा हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। ऐसे में यहां चुनाव की स्थिति बन गई है। इस बीच, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को महागठबंधन के नेताओं की बैठक बुलाई।  

हमारे पास काफी नंबर इसीलिए चुनाव लड़ रहे-तेजस्वी

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को चुनाव के लिए गठबंधन की रणनीति पर चर्चा करने के लिए महागठबंधन के विधायकों की बैठक बुलाई. मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा, यह बहुत पॉजिटिव मीटिंग थी। राज्यसभा चुनाव पास आ रहे हैं और हमें पूरा भरोसा है कि हमारी जीत होगी। हमारे पास काफी नंबर हैं, इसीलिए हम चुनाव लड़ रहे हैं।

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हम फैसला करेंगे कहां जाना है- अख्तरुल ईमान

तेजस्वी यादव की इस बैठक को लेकर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि हमें इसकी कोई खबर नहीं है। तेजस्वी यादव की पारिवारिक बैठक है। एक सवाल पर कहा कि ये तेजस्वी यादव से पूछिए कि उनको हमारी जरूरत है क्या? उनको जरूरत पड़ेगी उसके बाद हम लोग फैसला करेंगे। अख्तरुल ईमान ने आगे कहा कि तेजस्वी यादव की इच्छा थी कि हम लोग समर्थन करें और हम लोगों की है को वो हमारा करें। हमने तेजस्वी यादव से कहा था कि उच्च सदन में हम लोगों का कोई नहीं है। इस पर तेजस्वी यादव ने कहा था कि हम दिल्ली से आकर बात करेंगे। वे दिल्ली से आए, लेकिन अब तक कोई बात नहीं हो पाई है।

बिहार में पांचवी सीट पर फंसा पेंच

दरअसल, 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इसके आधार पर, एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचे हैं, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी।

विपक्ष को भी AIMIM की ही जरूरत

विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन है। महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इसे एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बसपा के एक विधायक, एआईएमआईएम के पांच विधायकों का समर्थन मिल जाए तो यह संख्या 41 तक पहुंच सकती है, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़ा है। यही वजह है कि इस चुनाव में इसकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

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