मोतिहारी में आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति से जुड़ा एक ऐतिहासिक पल आने वाला है। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 45 दिनों की लंबी यात्रा पूरी कर जल्द ही मोतिहारी पहुंचने वाला है। इस विशाल शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मंदिर में की जाएगी।

नारायणी नदी को पार करना चुनौती
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित विशालशिवलिंग काफी लंबा सफर करके बिहार के गोपालगंज तक तो ले आया गया है लेकिन इसे अपने गंतव्य पूर्वी चंपारण जिले तक ले जाने में एक कठिन चुनौती सामने आ गई है। शिवलिंग को नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण पहुंचाया जाना प्रस्तावित है।
पुल की जर्जर हालत से उठे सवाल
सबसे बड़ी चुनौती गंडक नदी पर स्थित जर्जर डुमरियाघाट सेतु को लेकर है। पुल की वर्तमान स्थिति और शिवलिंग के अत्यधिक वजन को देखते हुए यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतना भारी शिवलिंग नदी को सुरक्षित तरीके से कैसे पार करेगा।
शिवलिंग का वजन 210 टन
शिवलिंग का वजन 210 टन है, जबकि इसे ले जा रहे विशेष ट्रेलर (जिसमें 96 से अधिक पहिये हैं) का वजन करीब 160 टन है। यानी शिवलिंग और ट्रेलर का कुल भार 370 टन से अधिक है। डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि शिवलिंग को गोपालगंज से पूर्वी चंपारण ले जाने के लिए गंडक नदी (नारायणी नदी) पर बने डुमरिया घाट पुल को पार करना जरूरी है। यह पुल पुराना और जर्जर है। इस पर इतने भारी भार को ले जाना जोखिम भरा हो सकता है।
21 नवंबर 2025 को शुरू हुई थी यात्रा
यह दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग है। यह 33 फीट ऊंचा है और इसका वजन 210 टन है। विशाल शिवलिंग एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाया गया है। इस पर हजारों छोटे शिवलिंग भी उकेरे गए हैं, जो इसे खास बनाते हैं। इस शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुआ है। वहां से इसे विशेष ट्रेलर पर लाया जा रहा है। शिवलिंग महबलिपुरम से यात्रा 21 नवंबर 2025 को शुरू हुई थी। यह अब तक कई राज्यों को पार करते हुए 2500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर चुका है।

