डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली ’10 मिनट डिलीवरी’ सेवा पर रोक लगा दी है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सरकार के इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लिया गया एक ‘दूरदर्शी और मानवीय’ निर्णय करार दिया है। कैट का मानना है कि यह फैसला डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और सड़कों पर होने वाले जोखिमों को कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने संसद में उठाई थी आवाज
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल इस मुद्दे पर लंबे समय से मुखर रहे हैं। उन्होंने मानसून सत्र 2024 के दौरान संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें ‘डार्क स्टोर्स’ पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा था क्विक कॉमर्स का यह मॉडल न केवल शहरी नियोजन को बिगाड़ रहा है, बल्कि छोटे व्यापारियों को खत्म कर रहा है और डिलीवरी कर्मियों पर असुरक्षित दबाव डाल रहा है। आज सरकार की कार्रवाई ने साबित कर दिया कि हमारी चिंताएं जायज थीं।
CAIT के निरंतर संघर्ष की जीत
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई संगठन द्वारा वर्षों से की जा रही शिकायतों का परिणाम है। उन्होंने इस संघर्ष के प्रमुख पड़ावों का जिक्र किया।
अप्रैल 2025: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘डार्क रियलिटी’ का पर्दाफाश करते हुए राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
अक्टूबर 2025: केंद्र सरकार को विस्तृत पत्र भेजकर श्रम कानूनों के उल्लंघन और डिलीवरी कर्मियों के शोषण की शिकायत दर्ज कराई गई।
कैट ने बार-बार आगाह किया कि 10 मिनट की अव्यावहारिक समय-सीमा डिलीवरी कर्मियों को जानलेवा जोखिम लेने पर मजबूर करती है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
कैट के अनुसार, क्विक कॉमर्स कंपनियां हादसों के बाद जिम्मेदारी लेने से बचती रही हैं। सरकार के इस कदम से न केवल गिग वर्कर्स की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि व्यापारिक क्षेत्र में भी अनुशासन आएगा।
मुख्य बिंदु:
सुरक्षा को प्राथमिकता: डिलीवरी पार्टनर्स पर से समय का दबाव कम होगा।
भ्रामक दावों पर रोक: कंपनियां अब ग्राहकों को लुभाने के लिए असुरक्षित वादे नहीं कर पाएंगी।
संरचनात्मक सुधार: ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही तय होगी।
आगे क्या?
कैट ने सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। संगठन भविष्य में भी एक न्यायसंगत, पारदर्शी और कानूनसम्मत डिजिटल व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

