नीट परीक्षा विवाद और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। लंबे समय से विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठन उनकी जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे थे। मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधान बोले-10 दिनों का घटनाक्रम देख मन बहुत दुखी है
अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए धर्मेद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखा। उन्होंने साफ किया कि उनके लिए राष्ट्रसेवा सबसे ऊपर है। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन बहुत दुखी है। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है, बल्कि देश की युवा शक्ति ही असली ताकत है।देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।
नीट पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने लेटर में कहा कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उन्होंने लिखा कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया और जांच सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। प्रधान ने बताया कि अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का फैसला लिया गया है।
अनियमितताओं की ली जिम्मेदारी
उन्होंने लिखा, मैंने पहले ही दिन से इस पर जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
प्रधान के इस्तीफे की वजह
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई हफ्तों से बन रहा भारी सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव था। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा की शुचिता से समझौता होने के आरोपों को लेकर देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच और कानूनी कार्रवाई पहले से ही चल रही है। विरोधियों और छात्र संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को दूर करने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके बाद उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा।

