डिजिटल डेस्क।कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए कमर कस ली है। शुक्रवार को चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल और विशेष पर्यवेक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की। आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख निर्देश और बड़े बदलाव
नाम कटने का डर होगा खत्म: ‘तार्किक विसंगति’ और ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं की सूची अब सार्वजनिक की जाएगी। इससे उन लोगों को अपना नाम सुधारने का पारदर्शी मौका मिलेगा जिन्हें नाम कटने की आशंका थी।
दस्तावेजों के लिए 10 दिन का एक्स्ट्रा समय: जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति जताई गई है या कोई विसंगति मिली है, उन्हें अपने दस्तावेज जमा करने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
बशीरहाट जैसी गड़बड़ी पर ‘जीरो टॉलरेंस’: बशीरहाट में अवैध अधिकारियों द्वारा सुनवाई की खबरों पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने ऐसी सभी प्रक्रियाओं को शून्य घोषित कर दिया है। अब वहां नए सिरे से पारदर्शी सुनवाई होगी।
अफसरों के तबादले पर रोक: निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने उन IAS अधिकारियों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी है, जो वर्तमान में ‘रोल ऑब्जर्वर’ के तौर पर काम कर रहे हैं।
मतदाताओं के लिए नई सुविधाएं
आयोग ने इस बार चुनाव को और भी आधुनिक बनाने का फैसला किया है:
स्मार्ट वोटर स्लिप: सभी मतदाताओं को इस बार अधिक स्पष्ट और आधुनिक वोटर स्लिप दी जाएगी।
युवा मतदाताओं पर फोकस: शहरों में कम मतदान को देखते हुए 18 वर्ष के नए वोटर्स को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
सुरक्षा का भरोसा: बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि सुनवाई के दौरान कानून-व्यवस्था सख्त रखी जाए, ताकि आम नागरिक बिना किसी डर के अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें।
CEO का आश्वासन: राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बैठक में भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं कटने दिया जाएगा।

