हॉर्मुज के रास्ते गुजरने वाले हर जहाज से 18 करोड़ ट्रांजिट टोल शुल्क वसूलने की तैयारी में ईरान : दुनिया में महंगाई का खतरा

KK Sagar
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तेल सप्लाई की ‘नब्ज’ पर नियंत्रण की कोशिश, भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ेगा असर

ईरान और इज़रायल के बीच जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यह संघर्ष अब सिर्फ मिसाइल और ड्रोन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा असर डालने की तैयारी हो रही है।

ईरान अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ‘आर्थिक हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ रहा है। खबरों के मुताबिक, ईरानी संसद एक ऐसा कानून लाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत इस रास्ते से गुजरने वाले हर विदेशी जहाज से भारी ‘ट्रांजिट टोल’ वसूला जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, एक बड़े जहाज को यहां से गुजरने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये (2 मिलियन डॉलर) तक का शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान का तर्क है कि जो देश इस रणनीतिक मार्ग का उपयोग अपनी ऊर्जा और व्यापार के लिए करते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी चाहिए।

ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े मोहम्मद मोखबर ने संकेत दिया है कि यह कदम पश्चिमी देशों के खिलाफ ‘आर्थिक जवाब’ के तौर पर उठाया जा सकता है, जिन्होंने ईरान पर लंबे समय से प्रतिबंध लगाए हैं।

दुनिया की ‘नब्ज’ क्यों है हॉर्मुज?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे बड़ा ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसकी चौड़ाई बेहद कम होने के कारण यहां जहाजों की आवाजाही सीमित मार्गों से ही संभव है।

ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का इस क्षेत्र पर मजबूत नियंत्रण है, जिससे यह और भी संवेदनशील बन जाता है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।

अगर ईरान टोल वसूलना शुरू करता है, तो इसका सीधा असर पड़ेगा:

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

गैस और बिजली महंगी

खाद्य वस्तुओं के दाम में उछाल

महंगाई का नया दौर

अमेरिका की बढ़ी चिंता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपना चुके हैं। ऐसे में ईरान का यह कदम वॉशिंगटन के लिए नई चुनौती बन सकता है।

अगर ईरान का यह प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो यह सिर्फ एक ‘टोल टैक्स’ नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार होगा। तेल, गैस और व्यापार की लागत बढ़ने से पूरी दुनिया में महंगाई की आग भड़क सकती है, जिसका असर आम आदमी की जेब तक पहुंचेगा।

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