अमेरिका और Iran के बीच हुई अहम शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। ईरान ने अमेरिका की शर्तों को खारिज कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance पाकिस्तान से लौट गए।
ईरान का अमेरिका पर तीखा हमला
वार्ता विफल होने के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें” और “अवैध अनुरोध” रखने का आरोप लगाया।
घाना स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत में वे सभी शर्तें शामिल कीं, जिन्हें वह युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका था। ईरान ने इन मांगों को साफ तौर पर खारिज कर दिया।
21 घंटे चली बातचीत, नहीं निकला समाधान
लगभग 21 घंटे तक चली इस हाई-लेवल वार्ता के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। JD Vance ने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन दोनों देश अपने मतभेद कम नहीं कर पाए।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने अपनी “रेड लाइन” पहले ही स्पष्ट कर दी थी, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।
कौन-कौन रहा शामिल
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शामिल थे।
वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने नेतृत्व किया, जिनके साथ विदेश मंत्री Abbas Araghchi भी मौजूद थे।
युद्धविराम के बाद भी नहीं बनी बात
यह वार्ता ऐसे समय हुई जब दोनों देशों ने हाल ही में दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बावजूद बातचीत का विफल होना पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है।
वैश्विक असर की आशंका
अमेरिका-ईरान वार्ता के फेल होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव के बीच यह घटनाक्रम वैश्विक सुरक्षा, तेल आपूर्ति और कूटनीतिक संतुलन पर असर डाल सकता है।
इस्लामाबाद से JD Vance का खाली हाथ लौटना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

