बुढ़मू अंचल अधिकारी सचिदानंद कुमार वर्मा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई गिरफ्तारी को लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को “अवैध, असंवैधानिक और दमनकारी” बताया गया। हालांकि, संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ है, लेकिन जांच और गिरफ्तारी पूरी तरह कानून के दायरे में होनी चाहिए।
संघ ने लगाए कई गंभीर आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में संघ ने आरोप लगाया कि ACB ने गिरफ्तारी के दौरान कई कानूनी प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की। संघ का दावा है कि:
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति का पालन नहीं किया गया।
रिश्वत की प्रत्यक्ष मांग और स्वीकार्यता के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
सह-आरोपी के पुलिस हिरासत में दिए गए कथित बयान के आधार पर कार्रवाई की गई, जिसकी कानूनी वैधता नहीं है।
अंचल अधिकारी को देर रात/तड़के गिरफ्तार कर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया।
BNSS के प्रावधानों के अनुसार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
नामांतरण विवाद का भी किया उल्लेख
संघ ने प्रेस विज्ञप्ति में संबंधित नामांतरण (म्यूटेशन) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अंचल अधिकारी ने राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर आवेदन अस्वीकार किया था और आदेश में अपील का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया था। संघ का दावा है कि ऐसे प्रशासनिक निर्णय को आपराधिक साजिश का आधार नहीं बनाया जा सकता।
तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित
मामले की विस्तृत जांच के लिए झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने अपर सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने की घोषणा की है। समिति अपनी रिपोर्ट संघ को सौंपेगी।
सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग
संघ ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा ACB की गिरफ्तारी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित अधिकारी को न्याय नहीं मिला तो राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
दूसरा पक्ष: ACB का आरोप है कि बुढ़मू के अंचल अधिकारी सचिदानंद कुमार वर्मा को भूमि नामांतरण के मामले में कथित रूप से ₹4.50 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मामले में अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

