न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने किया विधिक सेवा शिविर का वर्चुअल उद्घाटन, 1.42 करोड़ की परिसंपत्तियों का वितरण

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर और राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय के द्वारा शनिवार को जमशेदपुर के सिदगोड़ा हॉल किया गया।इस अतिथियों के द्वारा लाभुकों के बीच लगभग 1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति व न्यायिक ट्रिब्यूनल द्वारा सड़क दुर्घटना में 9 मृतकों के आश्रितों को बीमा राशि का चेक प्रदान किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आम नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकारों, मौलिक अधिकारों और सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वांछित व लक्षित समूहों तक सुलभ रूप से पहुंचाना है। विशेष रूप से महिलाओं व वंचित वर्गो को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र के माध्यम से संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों की पहुंच लक्षित समूहों तक सुगमता से सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। नागरिकों को विभिन्न प्रकार के वाद-विवादों में अनावश्यक समय व धन की हानि से बचाने के उद्देश्य से लोक अदालत आपसी सहमति व समझौते के आधार पर विवादों के त्वरित व सौहार्दपूर्ण निपटारे का प्रभावी माध्यम है।

न्यायमूर्ति ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिलाओं व कमजोर वर्गों पर होने वाले अत्याचारों की रोकथाम के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने मानव तस्करी की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके मूल कारणों पर कार्य करने की आवश्यकता बताई और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया।

इस अवसर पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा लोक अदालत केवल वादों के निपटारा का माध्यम नहीं है बल्कि यह एक विश्वास का मंच है। न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं है समाज में आपसी समरसता, वादों का आपसी विश्वास के साथ समाधान एक दुसरे का सम्मान से हीं समाज में समाजिक न्याय दिया जा सकता है। न्याय व विकास दोनो एक दूसरे से जुड़ा मामला है। सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुगम तरीके से पहुचाने के लिए जिला प्रशासन हमेशा सकारात्मक प्रयास कर रहा है। लेकिन प्रभावी रूप से लक्षित वर्ग तभी लभांवित होगा जब उन्हे अपने अधिकारो तथा सरकार की सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त हों। उन्होने बेघर व गरीबों के लिए अवास, विभिन्न योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मिर्गी रोगी, सिकल सेल कैम्प लगाकर लोगों का इलाज किया जा रहा है। उन्होने कहा विधिक सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा जब समाज के कमजोर वर्ग व महिलाओं का समाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण हो एवं उन्हे अपने अधिकारों की जानकारी हो।

इस अवसर पर कुमारी रंजना अस्थाना सदस्य सचिव, झालसा ने स्वागत संबोधन किया। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव न्यायाधीश झारखंड हाईकोर्ट, आयोजन के बारे में अपने विचार रखते हुए कहा समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजना सुगमता से पहुंचे, उन्हे उनकी अधिकारों और सरकार की योजनाओं व मिलने वाले लाभ के बारे में जागरूक किया जाय। सबको न्याय के संकल्प के साथ नालसा तथा झालसा इस तरह की आयोजन के माध्यम से निरंतर प्रयासरत है। जिला एवं सत्र न्यायधीश पूर्वी सिंहभूम श्री अरविन्द कुमार पांडेय ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का अभार जताया तथा लोक अदालतों के माध्यम से वादों के निष्पादन की जानकारी दी।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन व राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर के अवसर पर न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय के अलावे न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय, कुमारी रंजना अस्थाना, सदस्य सचिव, झालसा रांची, अरविन्द कुमार पांडेय, जिला व सत्र न्यायधीश पूर्वी सिंहभूम, कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम, ऋषभ गर्ग, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएसन सहित वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी, न्यायाधीगण व अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान कस्तुरबा विद्यालय के बालिकाओं के द्वारा स्वागत गान किया गया। एलईडी स्क्रीन पर नालसा गाना व लीगल ऐड क्लीनिक झालसा पर अधारित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई और राष्ट्र गान के साथ मंचीय कार्यक्रम समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं और विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए लगाई गई प्रदर्शनी का अतिथियों के द्वारा भ्रमण किया गया।

1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति लाभुकों के बीच वितरित
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के द्वारा मंच से लगभग 1.42 करोड़ राशि का परिसम्पति लाभुकों के बीच वितरित की गई। झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से गोविंदपुर आजीविका संकुल संगठन के कविता देवी और पुनम देवी को 40 लाख का चेक, कल्याण विभाग की योजना तहत बिरसा आवास योजना से समीर सबर को गृह प्रवेश, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत जादु हेम्ब्रम को 11.30 लाख का ऋण, नानु पूर्ति को वन अधिकार पट्टा, समाज कल्याण विभाग की योजना के तहत कपील देव शर्मा को कान मशीन, सामाजिक सुरक्षा स्वामी विवेकानंद निःशक्त पेंशन योजना के तहत किशुन टुडू, आयुष रजक को स्पॉशरशिप स्वीकृति, उद्यान विभाग की योजना तहत साईबा मुर्मू को कीट रहित सब्जी उत्पादन इकाई, राहुल बारीक को पॉली हाउस निर्माण के लिए राशि का चेक, सहकारिता विभाग की योजना तहत सगेन सकाम, कृषक उत्पादक समूह डुमरिया को प्रमाण पत्र, गव्य विकास की दुधारू गाय वितरण योजना के तहत रूपा गुप्ता, पशुपालन विभाग की बकरा विकास योजना के तहत पम्पा मंडल, मत्स्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की तहत कैलाश बानरा, स्वास्थ्य विभाग की कुष्ठ निवारण ईकाई के द्वारा अजीत देवरी को किट, बसंती देवी को मलेरिया किट व श्रम विभाग की मृत्यु दुर्घटना सहायता योजना के तहत जासई सोरेन को 2 लाख की राशि प्रदान की गई।

इसके अलावा जमशेदपुर न्यायिक ट्रिब्यूनल के निर्णय के आधार पर विभिन्न बीमा कंपनियों के माध्यम से सड़क दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को बीमा राशि प्रदान किया गया, जिसमें 70 लाख रूपये जयंती व सुचिता प्रधान, 34.02 लाख रूपये महेन्द्र कुमार राम, 31.34 लाख रूपये लालती देवी व महेश्वर राय, 29.50 लाख रूपये सोनामनी हांसदा, राजीव हांसदा व शीला हांसदा को, 27.50 लाख रूपये जमुना मुर्मू, ममता मुर्मू, सावन मुर्मू, 27.46 लाख रूपये सुमिता महतो, असित कुमार महतो व प्रभाती रानी महतो, 21 लाख रूपये सुनदोरा गोराई, गणेश गोराई व आशीष गोराई, 18 लाख रूपये मिथुन कैवर्त व तिलोतमा देवी को चेक प्रदान किया गया।

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