डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां लेन-देन आसान हुआ है, वहीं ठगों ने भी ठगी के नए तरीके निकाल लिए हैं। ताजा मामला पालकोट थाना क्षेत्र के नाथपुर गांव का है, जहां ‘फेक यूपीआई पेमेंट’ के जरिए एक छोटे दुकानदार को चूना लगाने की कोशिश कर रहे दो युवकों को ग्रामीणों की सूझबूझ से पकड़ लिया गया।
कैसे बुना ठगी का जाल?
रांची के पिठौरिया निवासी मोहम्मद एजाज और मोहम्मद शोएब एक बाइक पर सवार होकर नाथपुर पहुंचे। उन्होंने एक ठेला संचालक, गिरीश कुमार के पास नाश्ता किया। बिल चुकाने के वक्त उन्होंने एक शातिर चाल चली।
नकद और डिजिटल का मेल: उन्होंने दुकानदार को झांसा दिया कि वह कुछ राशि नकद देंगे और बाकी यूपीआई से।
फर्जी ट्रांजैक्शन स्क्रीन: युवकों ने स्कैनर स्कैन किया और अपने फोन में ‘पेमेंट सक्सेसफुल’ का मैसेज दिखाकर तुरंत वहां से नौ दो ग्यारह हो गए।
दुकानदार की सतर्कता और ग्रामीणों का एक्शन
जब दुकानदार गिरीश कुमार ने अपना बैंक बैलेंस चेक किया, तो पता चला कि एक भी रुपया खाते में नहीं आया है। ठगी का अहसास होते ही उन्होंने शोर मचाया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए भाग रहे युवकों का पीछा किया और बागेंसरा गांव के पास उन्हें दबोच लिया। नाराज ग्रामीणों ने दोनों को पेड़ से बांधकर उनकी धुनाई की, हालांकि बाद में पालकोट पुलिस को सूचना देकर उन्हें कानून के हवाले कर दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और अपील
थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बताया कि दोनों युवक पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन युवकों ने पहले भी अन्य इलाकों में इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।
डिजिटल ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ स्क्रीन न देखें: ग्राहक के फोन पर ‘Success’ का मैसेज देखकर भरोसा न करें।
कन्फर्मेशन मैसेज का इंतजार करें: जब तक आपके अपने फोन पर बैंक का SMS न आए या आपके ऐप में ‘Payment Received’ न बोले, तब तक भुगतान अधूरा मानें।
साउंड बॉक्स का उपयोग: छोटे दुकानदार ‘UPI Soundbox’ का उपयोग कर सकते हैं, जो पैसा आते ही बोलकर पुष्टि करता है।

