पूर्व विधायक अरुण यादव की बढ़ीं मुश्किलें, ईडी ने दाखिल किया चार्जशीट, लालू परिवार के हैं करीबी

Neelam
By Neelam
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बिहार में अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। राजद के पूर्व विधायक अरुण यादव और उनके परिवार के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप पत्र दाखिल किया है। अरुण यादव को लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का बेहद करीबी माना जाता है। जिससे इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।

पत्नी किरण देवी को भी बनाया आरोपी

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदेश विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद विधायक अरुण यादव उर्फ अरुण कुमार सिंह, उनकी पत्नी किरण देवी, राजेश कुमार रंजन, दीपु कुमार और किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया है। इस मामले में ईडी ने मंगलवार को पटना स्थित पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। 

अवैध कारोबार से करोड़ों बनाने का आरोप

ईडी की जांच के अनुसार, पूरा मामला अवैध बालू खनन, भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक गतिविधियों के जरिए ‘अपराध की कमाई’ एकत्र करने से जुड़ा है। आरोप है कि अरुण यादव और उनके सहयोगियों ने बालू के अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये कमाए और उन पैसों को विभिन्न कंपनियों और संपत्तियों में निवेश कर ठिकाने लगाया।

आय और संपत्ति के बीच 36 करोड़ से अधिक का अंतर

जांच के दौरान वित्तीय विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच अरुण यादव और उनके परिवार ने लगभग ₹39.31 करोड़ की संपत्ति बनाई। जबकि इसी अवधि के दौरान उनकी कुल वैध आय केवल ₹2.65 करोड़ ही पाई गई। इस प्रकार, जांच एजेंसी ने लगभग ₹36.66 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का आकलन किया है, जिसका कोई वैध स्रोत नहीं मिला।

कई ठिकानों पर हो चुका है छापा

जांच के क्रम में ईडी ने 27 फरवरी 2024 को अरुण यादव, उनकी पत्नी और किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी आरा के अगियांव समेत पटना के विभिन्न स्थानों पर की गई थी। ईडी के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए नकद जमा, डेयरी और पशुपालन जैसे व्यवसायों के जरिये अधिक आय दर्शाई गई। इसके अलावा किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से भी धन को इधर-उधर घुमाकर उसे वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

21.38 करोड़ की संपत्ति पहेल ही कुर्क

वहीं, ईडी ने इस मामले में पहले ही कड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 21.38 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जिसकी पुष्टि PMLA के निर्णायक प्राधिकरण  ने भी कर दी है। वर्तमान में, विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज शिकायत को रिकॉर्ड पर ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में अभी भी आगे की जांच जारी है ताकि अपराध से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।

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