पाँच माह से वेतन नहीं
धनबाद सदर अस्पताल में डीएमएफटी फंड के तहत कार्यरत चिकित्सक पिछले पाँच महीनों से वेतन से वंचित हैं। वेतन भुगतान में देरी से नाराज़ चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बिना वेतन के लगातार सेवा देना अब संभव नहीं है। चिकित्सकों की इस नाराज़गी का सीधा असर अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर पड़ सकता है।
दस चिकित्सकों पर असर
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में डीएमएफटी फंड से करीब दस चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें डॉ. मुकेश प्रसाद, डॉ. रूमा प्रसाद, डॉ. स्नेहा केशरी, डॉ. मासूम आलम, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. आर. कुमार, डॉ. मनोज कुमार और डॉ. मृणाल को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। वहीं, डॉ. पीपी पांडेय और डॉ. एश गोलाश को सिर्फ दो माह का ही भुगतान हुआ है।
रोजाना 250 से अधिक मरीज प्रभावित
सदर अस्पताल में रोज़ाना मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री रोग, हड्डी रोग और दंत रोग विभाग में 250 से अधिक मरीजों का इलाज होता है। चिकित्सकों के नाराज़ होकर इस्तीफा देने पर इन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सिविल सर्जन का बयान
सिविल सर्जन अखिलेश विश्वकर्मा ने कहा कि कोरोना काल में डीएमएफटी फंड से चिकित्सकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन अब डीएमएफटी का वित्तीय बोझ काफी बढ़ चुका है। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से इन चिकित्सकों को हटाकर नियमित डॉक्टरों से ही सेवाएं ली जाएंगी ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

