डिजिटल डेस्क।चाईबासा: डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों की सुरक्षा में लापरवाही बरतना अब बैंकों को भारी पड़ सकता है। पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने साइबर ठगी के एक मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सदर बाजार शाखा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बैंक को न केवल ठगी गई राशि लौटाने का आदेश दिया है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के लिए जुर्माना भी लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
मंझारी थाना क्षेत्र की रहने वाली आशा तियू के साथ जून 2024 में साइबर धोखाधड़ी हुई थी। उनके SBI बचत खाते से 22 और 23 जून को दो किश्तों में कुल 1,48,000 रुपये की अवैध निकासी कर ली गई।
त्वरित सूचना: पीड़िता ने 24 जून को ही बैंक को लिखित जानकारी दी और पुलिस में FIR भी दर्ज कराई।
बैंक की लापरवाही: साइबर पोर्टल पर शिकायत के बावजूद बैंक ने न तो जांच शुरू की और न ही राशि वापस करने की कोई पहल की।
आयोग की फटकार और फैसला
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बैंक ने अपना पक्ष रखने में भी कोताही बरती। कई नोटिस के बावजूद बैंक की ओर से संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया गया। आयोग ने RBI के 6 जुलाई 2017 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बैंक को ‘सेवा में कमी’ का दोषी माना।
उपभोक्ता आयोग द्वारा जारी मुख्य निर्देश
मूल राशि की वापसी: बैंक 45 दिनों के भीतर ₹1.48 लाख की राशि ग्राहक को लौटाए।
मुआवजा: मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹25,000 का हर्जाना दें।
कानूनी खर्च: मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान करें।
ब्याज की शर्त: अगर 45 दिनों में भुगतान नहीं हुआ, तो बैंक को 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
ग्राहकों के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
यह आदेश उन सभी खाताधारकों के लिए एक मिसाल है जो साइबर ठगी के बाद बैंक के चक्कर लगाकर थक जाते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, यदि ग्राहक ठगी की सूचना तत्काल (3 दिनों के भीतर) बैंक को दे देता है, तो उस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी बैंक की होती है।

