डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: टाटा स्टील में नए वेज रिवीजन को लेकर प्रबंधन और यूनियन के बीच खींचतान तेज हो गई है। उच्च स्तरीय बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस बार मुख्य विवाद समझौते की अवधि और न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट को लेकर है।
क्या है पूरा विवाद?
टाटा स्टील प्रबंधन ने इस बार 8 साल के लंबे समझौते का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही प्रबंधन ने 7.25 प्रतिशत MGB देने की बात कही है। यूनियन इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं है, क्योंकि लंबी अवधि और कम एमजीबी से कर्मचारियों के आर्थिक हितों पर असर पड़ने की आशंका है।
डीए पॉइंट वैल्यू पर भी फंसा पेंच
बैठक के दौरान डीए के पॉइंट वैल्यू को लेकर भी यूनियन और प्रबंधन के बीच तीखी बहस हुई। मतभेद बढ़ते देख फिलहाल इस मुद्दे को अलग रख दिया गया है और अन्य बिंदुओं पर चर्चा जारी रखने का फैसला लिया गया है।
पुराने समझौतों से तुलना (एक्स्प्लेनर)
अगर पिछले रिकॉर्ड्स को देखें, तो समझौते की अवधि कम और लाभ अधिक रहे हैं:
2012 से 2017 का समझौता: इस दौरान MGB 18.25% था, जिससे औसतन 6,436 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई थी।
2018 से 2024 का समझौता: इसमें अवधि 7 साल की गई और MGB घटकर 12.75% रह गया, लेकिन फिर भी कुल वेतन में औसतन 14,845 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई थी।
यूनियन का पक्ष: यूनियन का मानना है कि इस बार प्रबंधन MGB को और भी कम (7.25%) कर रहा है और समय सीमा को बढ़ाकर 8 साल कर रहा है, जो कर्मचारियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

