संसद में आज पेश होगा पेपर लीक से जुड़ा कानून, 2024 में बने कानून में होगा बदलाव, सजा-जुर्माना दोनों बढ़ेंगे

Neelam
By Neelam
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सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने वाला विधेयक आज संसद में पेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह यह विधेयक सदन में पेश करेंगे। इसका उद्देश्य ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करना है। सरकार इस संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर चुकी है।

सजा-जुर्माना दोनों बढ़ेंगे

लोकसभा में आज पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। यह विधेयक परीक्षा पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया जा रहा है। इस बिल के जरिए 2024 में बने कानून में बदलाव किए जाएंगे। आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। जिसमें प्रश्नपत्र लीक से संबंधित अपराधों के लिए कारावास की अवधि को 10 साल तक और जुर्माने को 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। नए विधेयक में संगठित तरीके से अनुचित साधन पर सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल की गई है, जुर्माना राशि 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया गया है। गैर संगठित अपराध पर सजा न्यूनतम तीन व अधिकतम पांच वर्ष से बढ़ाकर पांच और 10 वर्ष कर दिया है। जुर्माना राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख कर दी गई है।

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव

इसमें पेपर लीक के आरोपियों को जल्द और सख्त सजा दिलाने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। इसमें पेपर लीक मामले में शिकायत दर्ज होने की तारीख से लेकर दो महीने में जांच पूरी करनी होगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज को तीन माह में केस का निपटारा कर फैसला सुनाना होगा। सभी राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेंगे। संशोधन कानून लागू होने के बाद सभी लंबित मामले स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किए जाएंगे। इनका भी निपटारा तीन महीने में करना होगा।

बिल लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। यह परीक्षा करीब 20 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी है। पिछले कुछ वर्षों में NEET, भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया के कई मामले सामने आए, जिससे परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं। पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए। कॉकरोच पार्टी के लंबे आंदोलन के बाद सरकार पर परीक्षा सुधार और सख्त कानून लाने का दबाव बढ़ा। शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रही है और केवल नया कानून नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों व परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

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