सुप्रीम कोर्ट की दोटूक: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं, जरूरत पड़ी तो होगी स्वतंत्र जांच

KK Sagar
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सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कहीं पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा पूरी तरह संरक्षित है। केवल प्रदर्शन होने से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। यदि कहीं पुलिस ने सीमा से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पूरे देश में प्रदर्शन से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों—दोनों को लगी चोट समान रूप से चिंता का विषय है। अदालत ने संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर एक समान दिशा-निर्देश और पुलिस प्रोटोकॉल की आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइंस बनाने की मांग की है।

इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक साथ सुनवाई करेगा। अदालत की टिप्पणी को लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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