​आखिर चाईबासा में क्यों मच गया हड़कंप? पुलिस को जबरन क्यों हटानी पड़ी भीड़, जानिए पूरा सच

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित चाईबासा बाईपास चौक शनिवार को झामुमो और आदिवासी हो समाज महासभा के बीच वर्चस्व की जंग का केंद्र बन गया। एक ही चौक पर अलग-अलग महापुरुषों की प्रतिमा लगाने के दावों को लेकर उपजे इस गतिरोध को शांत करने के लिए आखिरकार जिला प्रशासन को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। वार्ता की तमाम कोशिशें नाकाम रहने पर पुलिस बल ने धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को जबरन बस में बिठाकर मौके से हटा दिया।

झंडे, पोस्टर और नारेबाजी: चौक बना अखाड़ा
​विवाद की शुरुआत तब हुई जब झामुमो कार्यकर्ता बाईपास चौक पर दिशुम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा लगाने की तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच आदिवासी हो समाज महासभा के लोग जुलूस निकालते हुए चौक पर आ धमके। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। झामुमो ने अपने झंडे-बैनर और शिबू सोरेन का चित्र लगाया, तो जवाब में महासभा के सदस्यों ने भी अपना झंडा फहराते हुए वहां अमर शहीद पोटो हो की तस्वीर गाड़ दी। चौक पर घंटों तक दोनों ओर से ज़ोरदार नारेबाजी होती रही, जिससे माहौल में तल्खी बढ़ गई।

​’पोटो हो’ की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
​महासभा के सदस्य इस जिद पर अड़ गए कि चाईबासा बाईपास पर शिबू सोरेन नहीं, बल्कि क्षेत्र के वीर शहीद पोटो हो की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए।अपनी मांग को लेकर कार्यकर्ता वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

कड़ा फैसला: वार्ता विफल, तो पुलिस ने खाली कराया स्थल
​तनाव को देखते हुए सदर एसडीओ, एसडीपीओ, मुफस्सिल थाना प्रभारी और बाद में अपर उपायुक्त दल-बल के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने गतिरोध खत्म करने के लिए कई दौर की बातचीत की, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख़्त कदम उठाया।
बलपूर्वक बेदखली: पुलिस निगरानी में धरना दे रहे हो समाज महासभा के सदस्यों को उठाकर बसों में भरा गया और चौक से दूर ले जाया गया।
काम शुरू: धरना समाप्त होते ही झामुमो की ओर से प्रतिमा स्थल का निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया।
छावनी में तब्दील चौक: एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल मौके पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हर किसी की नज़र इस बात पर टिकी है कि चौक पर प्रतिमा लगाने के इस संवेदनशील मुद्दे का अंतिम समाधान प्रशासन कैसे निकालता है।

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