आज सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री व्रत रख रही हैं। ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर मनाया जाने वाला यह व्रत धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे, तभी से यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का भी विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। पूजा के लिए सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जा रहा है।
व्रत रखने वाली महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर कच्चा सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

