देशभर में आज 14 अप्रैल 2026 को बैसाखी का पावन पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन सिख धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं किसानों के लिए भी यह खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बैसाखी की तिथि 14 अप्रैल से शुरू हुई है। इस दिन का पुण्य काल सुबह 06:15 बजे से लेकर शाम 3:55 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति को पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
सिख इतिहास में इस दिन का विशेष महत्व है। वर्ष 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन उन्होंने पंज प्यारों को अमृत चखाकर एक नई परंपरा की शुरुआत की और ‘सिंह’ व ‘कौर’ की पहचान दी। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष अरदास, कीर्तन और नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
बैसाखी मूल रूप से कृषि से जुड़ा पर्व भी है। रबी की फसल, खासकर गेहूं की कटाई के बाद किसान भगवान का धन्यवाद करते हैं। पंजाब और हरियाणा के खेतों में इस दिन भांगड़ा और गिद्दा की धूम रहती है। किसान अपनी पहली फसल भगवान को अर्पित कर आने वाले वर्ष की खुशहाली की कामना करते हैं।
इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु सुबह पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करते हैं, वहीं घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है। सूर्य देव को अर्घ्य देना और गुरुद्वारों में जाकर ‘कड़ा प्रसाद’ ग्रहण करना तथा लंगर सेवा में भाग लेना पुण्यदायी माना जाता है। बैसाखी पर अनाज, पीले वस्त्र और गुड़ का दान करना भी अत्यंत शुभ होता है।
बैसाखी केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। पश्चिम बंगाल में इसे नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, असम में रंगाली बिहू, केरल में विशु और तमिलनाडु में तमिल नववर्ष के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

