मलेरिया का डंक कर रहा बीमार, DC राजीव रंजन की अपील- ‘खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत कराएं जांच’

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में पैर पसार रहे मलेरिया को मात देने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिले के संवेदनशील इलाकों में युद्धस्तर पर जांच, इलाज और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मलेरिया रोकथाम के प्रयासों को लेकर आयोजित एक प्रेस वार्ता में उपायुक्त राजीव रंजन ने साफ तौर पर कहा कि मलेरिया से डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि किसी भी बुखार को सामान्य समझने की गलती न करें, क्योंकि सही समय पर जांच और इलाज ही मलेरिया से बचाव का सबसे अचूक हथियार है।

14 दिनों में रिकॉर्ड 1 लाख से अधिक टेस्ट, पॉजिटिविटी रेट सिर्फ 1.96%
​सिविल सर्जन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 29 जून से 12 जुलाई 2026 के बीच जिले के सभी CHC, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और सदर अस्पताल में रिकॉर्ड 1,04,459 लोगों की मलेरिया जांच की गई। राहत की बात यह है कि इतनी बड़े पैमाने पर हुई जांच के बावजूद जिले की कुल मलेरिया पॉजिटिविटी दर मात्र 1.96 प्रतिशत ही दर्ज की गई है।

जांच और मरीजों का पूरा गणित
​कुल जांच: 1,04,459 (96,478 RDT और 7,981 स्लाइड जांच)
​कुल पॉजिटिव मरीज: 1,895
​पी. फाल्सीपेरम (PF) मामले: 1,491 (सबसे गंभीर रूप)
​पी. विवैक्स (PV) मामले: 353
​मिश्रित (Mixed) संक्रमण: 51

इन 4 प्रखंडों में सबसे ज्यादा खतरा, ‘फोकस्ड सर्विलांस’ शुरू
​प्रशासन ने जिले के उन इलाकों को चिन्हित कर लिया है, जहां मलेरिया के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी और इंडोर रेजिडुअल स्प्रे कराया जा रहा है। आंकड़ों के लिहाज से पोटका प्रखंड में सबसे ज्यादा 24,657 जांच की गई, जहां सर्वाधिक 667 पॉजिटिव मरीज मिले।
​इसके अलावा मुसाबनी में 15,150 जांच में 344 मरीज, घाटशिला में 12,121 जांच में 212 मरीज और डुमरिया में 11,060 जांच में 427 मलेरिया पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। इन सभी प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन त्वरित उपचार अभियान चला रहा है।

शहरी इलाकों में राहत: जहां एक तरफ ग्रामीण इलाकों में मामले ज्यादा हैं, वहीं शहरी क्षेत्र के ‘अर्बन मानगो’ में इस अवधि के दौरान मलेरिया का एक भी मरीज नहीं मिला। इसके अलावा अर्बन बिरसानगर में केवल दो मामले सामने आए हैं। वहीं सदर अस्पताल का पॉजिटिविटी रेट 14.36% रहा, जिसका कारण वहां गंभीर और रेफर मरीजों का आना है।

6 मरीजों की मौत, उपायुक्त ने दिए डेथ ऑडिट के निर्देश
​जिले में मलेरिया के कारण अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 4 मौतें सेरेब्रल मलेरिया (दिमागी मलेरिया) और 2 मौतें मिक्स्ड इन्फेक्शन की वजह से हुई हैं। उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि प्रत्येक मृत्यु की चिकित्सकीय समीक्षा कराई जा रही है ताकि इलाज की व्यवस्था को और बेहतर किया जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाए, तो जटिलताओं और मौत को 100% रोका जा सकता है।

जिला प्रशासन की अपील: ‘सेल्फ मेडिकेशन’ से बचें, यह 5 काम जरूर करें
​उपायुक्त ने मीडिया के माध्यम से जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की भागीदारी के बिना यह जंग अधूरी है।
खुद डॉक्टर न बनें: बुखार होने पर खुद से दवा खरीदने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर मुफ्त जांच कराएं।
पानी जमा न होने दें: अपने घर, कूलर और आसपास के इलाकों में पानी इकट्ठा न होने दें।
मच्छरदानी है जरूरी: सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का प्रयोग करें।
IRS टीम का सहयोग करें: स्वास्थ्य विभाग की जो टीमें घरों में दवा का छिड़काव (IRS) या सर्वे करने आ रही हैं, उन्हें सहयोग दें।
24 घंटे में इलाज: प्रशासन का लक्ष्य है कि संदिग्ध मरीज की पहचान कर 24 घंटे के भीतर उसका इलाज शुरू कर दिया जाए, इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत सूचित करें।

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