रामगढ़। राजभवन के आमंत्रण पर एनएसयूआई झारखंड के संगठन प्रभारी संकेत सुमन ने महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर ओबीसी छात्रवृत्ति सहित छात्रहित के गंभीर मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश स्तर पर उत्पन्न शैक्षणिक अव्यवस्था को लेकर राजभवन बुलाया गया था।
संकेत सुमन ने महामहिम को अवगत कराया कि झारखंड में करीब 4.50 लाख छात्र-छात्राएँ ओबीसी छात्रवृत्ति से सीधे प्रभावित हैं। छात्रवृत्ति की लंबित राशि के कारण विद्यार्थियों की फीस, परीक्षा फॉर्म, हॉस्टल, अध्ययन सामग्री और नियमित पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
🔹 छात्र न्याय से जुड़ा है मामला
संकेत सुमन ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल धनराशि का नहीं बल्कि छात्रों के अधिकार और न्याय से जुड़ा है। उन्होंने महामहिम से आग्रह किया कि इस विषय में शीघ्र हस्तक्षेप कर छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। साथ ही विश्वविद्यालयों में व्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक अव्यवस्था को भी तत्काल दुरुस्त कराया जाए।
🔹 आंदोलन जारी रखने का ऐलान
संकेत सुमन ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से लगातार जारी रहेगा और छात्रहित की आवाज हर मंच पर उठाई जाएगी।
🔹 राज्यपाल ने दिए आवश्यक निर्देश
महामहिम राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने OSD नितिन मदन कुलकर्णी को निर्देश दिया कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर संभावित कार्रवाई की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
🔹 ज्ञापन की प्रमुख मांगें
एनएसयूआई द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुख रूप से ये मांगें रखी गईं—
ओबीसी छात्रवृत्ति (सत्र 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) का अविलंब भुगतान।
सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराए जाएँ।
कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक सहित स्थायी नियुक्तियाँ जल्द की जाएँ।
शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर सत्र नियमित किया जाए।
“एक व्यक्ति-एक पद” लागू कर आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
संकेत सुमन ने दोहराया कि छात्रहित की इस लड़ाई में संगठन पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहेगा और छात्रों के अधिकार के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

