बंगाल चुनाव से पहले महासंग्राम: चुनाव आयोग की बैठक में ‘रण’, मंत्री चंद्रिमा बोलीं- महिला हूं तो क्या चुप रहूं?

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कोलकाता में केंद्रीय चुनाव आयोग की फुल बेंच और राजनीतिक दलों की बैठक हंगामेदार रही। सोमवार को हुई इस बैठक में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच उस वक्त तीखी बहस हो गई, जब टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची और अन्य मुद्दों पर आयोग को घेरना शुरू किया।

यह महिलाओं का अपमान है’— चंद्रिमा भट्टाचार्य का CEC पर प्रहार
बैठक से बाहर निकलते ही ममता सरकार की वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा मैं एक महिला हूं और मुख्य चुनाव आयुक्त मुझे कह रहे हैं— ‘चिल्लाओ मत’। यह केवल मेरा नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति उनके अनादर को दर्शाता है। क्या एक महिला का अपनी बात मजबूती से रखना चिल्लाना है? मुख्य चुनाव आयुक्त का काम महिलाओं पर चिल्लाना नहीं है।

इन मुद्दों पर चुनाव आयोग को घेरा
तृणमूल कांग्रेस ने बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

मतदाता सूची से नाम कटना: चंद्रिमा ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। नागरिकों को अपनी पहचान साबित करने के लिए लाइनों में खड़ा करना आयोग की विफलता है।

SIR का मुद्दा: टीएमसी नेताओं ने जब एसआईआर पर बात करनी चाही, तो आयोग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इस पर चंद्रिमा ने पलटवार किया, ‘अगर हमें सुनना ही नहीं था, तो बुलाया क्यों?’

भाजपा का नैरेटिव: मंत्री फिरहाद हकीम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा द्वारा तय किए गए ‘घुसपैठिया’ वाले झूठे नैरेटिव पर काम कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पहचान साबित करने की प्रक्रिया में जिन नागरिकों की जान गई, उसका जिम्मेदार कौन है?

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
चुनाव आयोग के साथ इस महत्वपूर्ण बैठक में टीएमसी की ओर से मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और पूर्व डीजीपी व राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार मौजूद थे। हालांकि, चुनाव कितने चरणों में कराए जाएं, इस सवाल पर टीएमसी नेताओं ने फिलहाल चुप्पी साधे रखी।

विपक्ष (भाजपा और अन्य दलों) ने भी सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव को लेकर अपनी मांगें रखी हैं, जिससे आगामी चुनाव के दौरान राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

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