महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा,अब आगे क्या करेगी केन्द्र की मोदी सरकार?

Neelam
By Neelam
3 Min Read

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन विधेयक के पक्ष में सिर्फ 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया।

विधेयक पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी

लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

बाकी दो विधेयकों को भी नहीं बढ़ाया आगे

सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल पास न होने से महिला आरक्षण पर क्या असर पड़ेगा?

2023 में पास हुआ महिला आरक्षण कानून (106वां संशोधन, नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पहले से ही लागू हो चुका है, लेकिन उसका इम्प्लिमेंटेशन परिसीमन पर टिकी हुई है। मूल कानून कहता था कि महिला आरक्षण पहली जनगणना के बाद परिसीमन के बाद ही लागू होगा। 131वां संशोधन बिल इसी को बदलने के लिए लाया गया था, ताकि 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन हो और 2029 के लोकसभा चुनाव से ही 33% महिला आरक्षण शुरू हो जाए। अब यह बिल पास नहीं होने से 2023 का मूल कानून वैसा का वैसा रहेगा। मतलब, महिला आरक्षण अब अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन पूरा होने के बाद ही लागू होगा।

Share This Article