पावन चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन आज श्रद्धालु माता दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है, जिन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।
🌼 मां कूष्मांडा का स्वरूप और महिमा
मां कूष्मांडा को अष्टभुजी देवी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा जैसे दिव्य आयुध सुशोभित रहते हैं। मान्यता है कि मां सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं और उनके तेज से ही सूर्य प्रकाशित होता है। इसी कारण उन्हें ऊर्जा और प्रकाश की देवी भी कहा जाता है।
🛕 पूजा विधि और भोग
नवरात्रि के चौथे दिन भक्त सुबह स्नान कर साफ स्थान पर मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर फूल अर्पित किए जाते हैं और मंत्रों का जाप किया जाता है। पूजा के दौरान मां को विशेष रूप से कद्दू (कूष्मांड), मालपुआ, हलवा, दही, मिश्री और फल का भोग लगाया जाता है, जो उन्हें अत्यंत प्रिय है। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण किया जाता है।
✨ पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उनके आशीर्वाद से रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। खासकर कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए इस दिन की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मां कूष्मांडा का संबंध सूर्य ग्रह से है। उनकी पूजा करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और व्यक्ति को मान-सम्मान तथा आत्मबल प्राप्त होता है।
📿 मंत्र और स्तुति
स्तुति मंत्र:
“सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥”
बीज मंत्र:
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः”
प्रार्थना मंत्र:
“या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है। उनकी कृपा से व्यक्ति नकारात्मकता पर विजय प्राप्त कर सुख-समृद्धि की ओर अग्रसर होता है। श्रद्धालुओं को इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से मां की आराधना करनी चाहिए।

