आदिवासी महाजुटान से गरमाई झारखंड की सियासत, BJP-कांग्रेस आमने-सामने

Reena Sharma
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महाजुटान से गरमाई राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप के बीच आदिवासी अस्मिता बनी मुद्दा
झारखंड में आयोजित आदिवासी महाजुटान को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासियों को धोखा देने और मिशनरियों का सहारा लेकर उन्हें भटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है कि आदिवासियों की एकजुटता और महाजुटान की सफलता से बीजेपी घबरा गई है।
बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि कांग्रेस ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए मिशनरियों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि शिक्षित होने के नाते मिशनरी आदिवासियों को सही राह दिखाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने अलग झारखंड राज्य आंदोलन के दौर का जिक्र करते हुए नरसिम्हा राव सरकार को भी निशाने पर लिया। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चाहती तो उसी समय झारखंड राज्य का गठन हो सकता था, लेकिन उसने आदिवासियों के साथ विश्वासघात किया।
कांग्रेस ने पलटवार कर बीजेपी की नीयत पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष के हमले पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी पर आदिवासी एकजुटता से घबराने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि आदिवासी महाजुटान की सफलता और बड़ी संख्या में आदिवासियों की भागीदारी से बीजेपी और नेता प्रतिपक्ष पूरी तरह परेशान हैं। कांग्रेस ने बीजेपी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी झारखंड को वनांचल और आदिवासियों को वनवासी के रूप में पहचान देने की कोशिश करती रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता बीजेपी के इन कथित मंसूबों को अच्छी तरह समझती है।
आदिवासी अस्मिता पर आमने-सामने दोनों दल
कांग्रेस ने कहा कि उसने कभी आदिवासियों को छलने का काम नहीं किया। पार्टी के मुताबिक महाजुटान में आदिवासियों की ऐतिहासिक भागीदारी ने यह दिखा दिया है कि समुदाय अपने अधिकार, पहचान और अस्मिता को लेकर एकजुट है। इसी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती दिखाई दे रही है।
झारखंड गठन का इतिहास फिर बना सियासी हथियार
महाजुटान के बाद झारखंड राज्य गठन का पुराना इतिहास एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। बीजेपी कांग्रेस के शासनकाल और झारखंड गठन में कथित देरी को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस बीजेपी की आदिवासी नीति और झारखंड की पहचान को लेकर उसके पुराने रुख पर सवाल खड़े कर रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच आदिवासी अस्मिता और अधिकार प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बनते जा रहे हैं।
महाजुटान से आगे बढ़ेगी सियासी लड़ाई?
झारखंड में जैसे-जैसे राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ रही हैं, आदिवासी अस्मिता, राज्य गठन का इतिहास और आदिवासी अधिकारों की राजनीति फिर से चर्चा के केंद्र में आ गई है। आदिवासी महाजुटान ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच नई सियासी बहस को जन्म दे दिया है। अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि महाजुटान से उठी यह राजनीतिक हलचल किस दिशा में आगे बढ़ती है और झारखंड की सियासत पर इसका कितना असर पड़ता है।

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