कोलकाता में सनातनी रंग में रंगेगी दुर्गापूजा: चलताबागान समिति ने की ‘निशान’ थीम की घोषणा

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता में दुर्गापूजा के पारंपरिक स्वरूप को एक नया और आध्यात्मिक आयाम मिलने जा रहा है। उत्तर कोलकाता की प्रतिष्ठित माणिकतला ‘चलताबागान लोहापट्टी दुर्गापूजा समिति’ ने अपनी 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस साल की थीम ‘निशान’ की घोषणा कर दी है। इस बार का आयोजन सिर्फ उल्लास और रोशनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सनातन परंपराओं, गहरी आस्था और छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध रामनामी समाज के संघर्ष व भक्ति भाव को समर्पित होगा।

राम नाम की अमिट छाप और इतिहास की अनकही दास्तान
समिति इस बार छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक रामनामी समाज की जीवनशैली और संस्कृति को पंडाल के जरिए जीवंत करेगी। 1890 के दशक में स्थापित इस विशिष्ट भक्त समुदाय ने सदियों पहले सामाजिक भेदभाव और मंदिरों में प्रवेश पर रोक के खिलाफ एक अनूठा और शांतिपूर्ण मार्ग चुना था। विरोध के रूप में इन लोगों ने अपने पूरे शरीर पर स्थायी रूप से ‘राम’ नाम गुदवा लिया और इसे ही अपनी सच्ची आस्था और जीवन भर की पूंजी मान लिया। चलताबागान के इस बार के पंडाल में इसी प्रेरणा, संस्कृति और प्रतिरोध के इतिहास को बेहद करीब से महसूस किया जा सकेगा।

पंडित विश्व मोहन भट्ट की तीन पीढ़ियों का जादुई संगीत
इस आयोजन को और अधिक दिव्य बनाने के लिए ग्रैमी पुरस्कार विजेता और पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात संगीतकार पंडित विश्व मोहन भट्ट ने एक खास धुन तैयार की है। इस विशेष संगीत रचना में पारंपरिक भारतीय लय, ढोल और पखावज जैसे प्राचीन वाद्यों के साथ महिषासुरमर्दिनी के भावों को पिरोया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस धुन को पंडित भट्ट की तीन पीढ़ियों ने मिलकर तैयार किया है, जो कोलकाता के विभिन्न पंडालों में गूंजेगी।

डिजिटल दुनिया से जुड़ेगी दुर्गापूजा और बदलेंगे आयोजन के मायने
आयोजन समिति के चेयरमैन संदीप भूतोरिया ने ऐलान किया है कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कोलकाता की दुर्गापूजा को वैश्विक स्तर पर और अधिक सुलभ बनाने के लिए जल्द ही ‘दुर्गापूजा कनेक्ट’ ऐप लॉन्च किया जाएगा। इसके माध्यम से दुनिया भर के कला प्रेमी और प्रवासी भारतीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ सकेंगे। वहीं, बंगाल भाजपा के नेता और उद्घाटन समिति के अध्यक्ष शिशिर बाजोरिया ने कहा कि इस बार का आयोजन उत्सव के कम और सनातनी रीति-रिवाजों और परंपराओं के पालन पर अधिक केंद्रित रहेगा, जो बंगाल में अपने आप में एक अनूठी पहल होगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ से आए रामनामी समाज के वरिष्ठजन और कई गणमान्य लोग विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने इस घोषणा समारोह को और भी ऐतिहासिक बना दिया।

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