चाइनीज झालर छोड़िए, माटी से नाता जोड़िए! शुभेंदु अधिकारी की अपील ने खींचा सबका ध्यान

Manju
By Manju
2 Min Read

डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया:आगामी कालीपूजा और दीपावली के त्योहारी सीजन को लेकर पश्चिम बंगाल में सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच राज्य के प्रमुख नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने जनता से एक अनूठी और स्वदेशी अपील की है। उन्होंने लोगों से जोर देकर कहा है कि वे त्योहारों के दौरान ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को जमीन पर उतारें और आधुनिक इलेक्ट्रिक झालरों के साथ-साथ मिट्टी के दीये जलाने की पुरानी परंपरा को फिर से अपनाएं।

कुम्हारों के जीवन में दीये से लाएं उजाला
​राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के कई इलाकों में कालीपूजा पंडालों के उद्घाटन के सिलसिले में पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आधुनिक सजावट या फैंसी लाइटों के इस्तेमाल से किसी को परहेज नहीं होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी संस्कृति और मिट्टी से जुड़े कारीगरों को ही भूल जाएं। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस बार दीवाली की खरीदारी में स्थानीय कुम्हारों के चाक पर बने दीयों को जरूर शामिल करें। अधिकारी के मुताबिक, ऐसा करने से न सिर्फ हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि उन गरीब और मेहनतकश कुम्हारों के घरों में भी आर्थिक खुशहाली आएगी जो साल भर इस त्योहार का इंतजार करते हैं।

बढ़ते प्रदूषण और घटती प्रकृति पर जताई चिंता
​समारोहों को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने त्योहारों के वक्त होने वाले अत्यधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने भारी भरकम आवाज वाले पटाखों से तौबा करने और पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) विकल्प चुनने की सलाह दी। ​इस दौरान उन्होंने अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि पहले के समय में कालीपूजा के दिनों में ‘श्यामापोका’ बहुतायत में नजर आते थे, जो अब आधुनिकता और बढ़ते प्रदूषण की भेंट चढ़कर लगभग गायब हो चुके हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए ही इस पर्व को उल्लास के साथ मनाएं।

Share This Article