डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : उत्तर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ता की जांच में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कंटीनेन्ट से जुड़े आतंकवादियों को लेकर कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। एटीएस ने 12 और 14 सितंबर को मोहम्मद नबील और मकसूद अली को आज़गढ़ और तमिलनाडु से गिरफ्तार किया था। शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि ये दोनों संदिग्ध विस्फोटक यानी बम तैयार करने के लिए पोटैशियम नाइट्रेट की तलाश में जुटे हुए थे।
पाकिस्तान और तुर्की जाने की थी योजना
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्ध आतंकी ट्रेनिंग लेने के मकसद से पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की की यात्रा करने की पूरी तैयारी कर चुके थे। इसके अलावा, वे ‘फ्लेम्स ऑफ वॉर’ सहित कई अन्य कट्टरपंथी ऑनलाइन समूहों से भी जुड़े हुए थे। इन मंचों के जरिए बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब जैसे देशों के कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों से संपर्क साधा जाता था।
किताबों के जरिए वैचारिक विस्तार और कोडिंग में बातचीत
साहित्य का प्रसार: संदिग्ध आरोपी नबील और मकसूद अलकायदा आतंकी अनवर उल अवलाकी की पुस्तक ‘जिहाद करने के 44 तरीके’ और AQIS प्रमुख मौलाना आसिम उमर की किताबें जैसे ‘तीसरी जंग-ए-अजीम’ व ‘दज्जाल’ को साझा करते थे।
सुरक्षित ऐप का इस्तेमाल: एटीएस सूत्रों का कहना है कि संगठन से जुड़े लोग आपस में बात करने के लिए सुरक्षित मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करते थे।
कोडवर्ड का खेल: पकड़े गए संदिग्ध बातचीत के दौरान कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते थे। जैसे- केमिकल के लिए ‘जूस’, हथियार के लिए ‘पेन’ और जिहाद के लिए ‘मैदान’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था।
नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी एटीएस
फिलहाल एटीएस इस पूरे आतंकी नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है। सुरक्षित ऐप पर उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों और कोडवर्ड्स की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर प्रदेश के अलावा देश-विदेश के अन्य कौन-कौन से लोग इस खतरनाक नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इस मामले में कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

