पलामू के विश्रामपुर प्रखंड कार्यालय के समक्ष MMDR संशोधन अधिनियम के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने धरना-प्रदर्शन किया। मुख्य वक्ता अविनाश देव ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज झारखंड की पहचान हैं। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन बीडीओ को सौंपा गया।
केंद्र की खनिज नीति पर सवाल
अविनाश देव ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा से देश को ऊर्जा और उद्योग मिलता है, लेकिन राज्य की जनता के अधिकार और हित भी सुरक्षित होने चाहिए। उन्होंने MMDR संशोधन के प्रावधानों पर सवाल उठाए।
राज्य के अधिकार की बात
उन्होंने कहा कि झामुमो की आपत्ति राज्य के अधिकार, राजस्व और आदिवासी-मूलवासी समाज के हितों से जुड़ी है। खनिज संपदा पर झारखंड के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की गई।
कॉरपोरेट हितों के खिलाफ विरोध
अविनाश देव ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज को कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
झारखंड के संघर्ष का किया जिक्र
उन्होंने बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, नीलांबर-पीतांबर और तिलका मांझी के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड की संपदा और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठती रहेगी।
विकास के साथ जनता के हित की मांग
अविनाश देव ने कहा कि झामुमो विकास का विरोधी नहीं है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें खनिज संपदा से झारखंड की जनता को भी न्यायपूर्ण अधिकार मिले।
MMDR कानून पर पुनर्विचार की मांग
धरने में MMDR संशोधन कानून पर पुनर्विचार, झारखंड के संवैधानिक और आर्थिक अधिकार सुरक्षित रखने तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के हितों की रक्षा की मांग की गई। धरने में इमामुल अंसारी समेत पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

