डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : झारखंड के गुमला जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु गांव में देर रात हाथियों के झुंड ने एक ग्रामीण की जान ले ली। इस भयावह घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
घरों से बाहर निकले थे ग्रामीण, आधे किलोमीटर तक घसीटकर मार डाला
मिली जानकारी के अनुसार इलाके में पिछले कुछ दिनों से जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड लगातार विचरण कर रहा है। देर रात (करीब एक बजे) जब हाथियों का झुंड गांव के करीब आ धमका, तो अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए 40 वर्षीय निकोलस तोपनो समेत कुछ ग्रामीण उन्हें गांव से दूर भगाने के लिए बाहर निकले। इसी दौरान निकोलस तोपनो हाथियों के झुंड की चपेट में आ गए। आरोप है कि एक उग्र हाथी ने निकोलस को अपनी सूंड में लपेटा और उन्हें करीब आधा किलोमीटर तक घसीटते हुए ले गया, जिसके बाद उन्हें कुचलकर बेरहमी से मार डाला। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई और शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।
वन विभाग पर फूटा लोगों का गुस्सा
घटना के बाद से ग्रामीणों का सब्र टूट गया है। लोगों का आरोप है कि हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से इलाके में डेरा डाले हुए था, इसके बावजूद वन विभाग ने हाथियों को सुरक्षित तरीके से खदेड़ने या भगाने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया। अगर समय रहते विभाग सतर्क हो जाता, तो शायद एक हंसता-खेलता परिवार इस त्रासदी का शिकार न होता।
प्रशासन की ओर से त्वरित सहायता और मुआवाजा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मृतक के परिजनों को तत्काल 1 लाख रुपये की सहायता राशि (जिसमें 20 हजार नकद और 80 हजार रुपये का चेक शामिल है) सौंपी गई। साथ ही, एक सप्ताह के भीतर मुआवजे की शेष राशि भी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। इस दौरान प्रखंड प्रमुख सुनील सुरिन, मुखिया वीरेंद्र सुरिन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बढ़ती दहशत और प्रशासन की अपील
क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी से आसपास के दर्जनों गांवों के लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर हाथियों के करीब न जाएं, झुंड को खुद से न भगाएं और हाथियों की गतिविधियों की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि समय रहते बचाव कार्य किया जा सके।

