डिजिटल डेस्क/जमशेदपुर: टाटा कमांड एरिया में रहने वाले निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट न होने की वजह से नए मकानों में बिजली और पानी के कनेक्शन पर लगी पाबंदियों को हटाने का बड़ा निर्णय लिया गया है। डीसी कार्यालय में हुई एक अहम बैठक में इस समस्या के समाधान को लेकर रूपरेखा तैयार की गई है।
क्या था पुराना नियम और अब क्या होगा बदलाव?
पूर्व की व्यवस्था: अभी तक नियम यह था कि जब तक जेएनएसी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं करता, तब तक नया बिजली-पानी का कनेक्शन मिलना असंभव था।
हाईकोर्ट का रुख और नया तर्क: पूर्व में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष यह पक्ष रखा गया था कि बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के कनेक्शन न दिए जाएं। हालांकि, प्रशासन का यह मानना है कि बिजली और पानी हर नागरिक की बुनियादी जरूरत है।
एसोसिएशन की पहल: टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड सर्विसेज और जेएनएसी की संयुक्त टीम अगले 7 दिनों के भीतर एक विशेष गाइडलाइन तैयार करेगी।
बैठक में लिए गए मुख्य बिंदु
संयुक्त कमेटी का गठन: मंगलवार को डीसी कार्यालय में टाटा स्टील यूटिलिटीज और विधिक टीम की उच्च अधिकारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि दोनों विभागों की एक संयुक्त कमेटी एक सप्ताह के अंदर एसओपी तैयार करेगी।
कानूनी परीक्षण: इस मामले को राज्य के महाधिवक्ता के पास कानूनी जांच के दायरे में भेजा जाएगा, ताकि कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद परिवारों को बिजली और पानी के कनेक्शन सुगमता से मिल सकें।
सवालों के घेरे में पाबंदी: झारखंड जिले के बाकी हिस्सों या पूर्वी सिंहभूम के अन्य शहरों में ऐसी कोई पाबंदी लागू नहीं है, ऐसे में सिर्फ टाटा कमांड क्षेत्र के नागरिकों पर ही इस तरह की बंदिशें क्यों थोपी गई हैं, इस पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रशासन और संबंधित कंपनियों के इस संयुक्त कदम से जल्द ही हजारों मकान मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें कागजी औपचारिकताओं की वजह से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था।

