डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के पहियों को रफ्तार देने की दिशा में पूर्व रेलवे ने एक अहम मील का पत्थर पार कर लिया है। कोलकाता के अत्यधिक व्यस्त सियालदह स्टेशन पर ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिकीकरण का काम तय समयसीमा से पहले ही पूरा कर लिया गया है। इस पूरी कवायद का मकसद देश के इस प्रमुख टर्मिनल पर रेल परिचालन को और अधिक सुरक्षित और दुरुस्त बनाना है।
नियोजित ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान रेलवे के इंजीनियरों और तकनीकी अमले ने इस चुनौतीपूर्ण काम को अंजाम दिया। हालांकि इसके लिए रात 12 बजे से सुबह 7 बजे तक यानी कुल सात घंटे का ब्लॉक निर्धारित किया गया था, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद टीम ने कमाल दिखाते हुए निर्धारित समय से 20 मिनट पहले यानी सुबह 6:40 बजे ही काम मुकम्मल कर लिया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित कर दिया।
क्या-क्या हुआ बदलाव?
सियालदह स्टेशन सीमा के अंतर्गत डाउन मेन लाइन पर बुनियादी ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड किया गया है।
भारी वजन वाले ट्रैक: प्वाइंट संख्या 208ए/209बी और 206बी को पुराने 52 किलोग्राम ट्रैक से बदलकर आधुनिक और मजबूत 60 किलोग्राम रेलपाटा में तब्दील किया गया है।
नई लाइनें और जोड़: मौके पर कुल 112 मीटर लंबी नई रेललाइन बिछाई गई है। इसके अलावा, बेहतर स्थिरता के लिए 6.5 मीटर लंबाई के छह प्रीफैब्रिकेटेड 60 किलोग्राम ग्लूड इंसुलेटेड रेल जाइंट्स लगाए गए हैं।
सिग्नलिंग सिस्टम में सुधार: सिग्नल और टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने भी अपनी तरफ से पूरी ताकत झोंकते हुए तीन प्वाइंट मोटरों को नए मानकों के अनुसार बदल दिया है।
जमीनी स्तर पर झोंकी गई ताकत
इस पूरे अभियान को परवान चढ़ाने के लिए रेलवे ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। महाप्रबंधक गीतिका पांडेय और सियालदह मंडल के डीआरएम राजीव सक्सेना की सीधी निगरानी में चले इस अभियान में कुल 80 कुशल श्रमिक, छह बैच के फिटर्स, छह विभागीय फिटर्स और 42 ट्रैकमैन समेत भारी भरकम मानव संसाधन ने मैराथन रूप से काम किया। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी के अनुसार सियालदह जैसे अति-व्यस्त यार्ड में इस तरह के तकनीकी उन्नयन से न सिर्फ ट्रेन हादसों की गुंजाइश खत्म होती है, बल्कि ट्रेनों की आवाजाही भी ज्यादा सुचारु होती है। रेलवे का यह प्रयास यात्रियों को एक सुरक्षित, विश्वसनीय और आरामदायक सफर का भरोसा दिलाने की एक मजबूत कड़ी है।

