बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बीच वेतन विसंगति का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2022 के बाद नियुक्त नए शिक्षकों को समान श्रेणी के पुराने शिक्षकों की तुलना में अधिक वेतन मिलने से असंतोष बढ़ गया है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग पर दबाव तेज कर दिया है।
40 हजार से अधिक शिक्षक वेतन विसंगति से प्रभावित
कक्षा 1 से 12 तक के 40 हजार से अधिक शिक्षक इस वेतन असमानता की चपेट में हैं। वर्ष 2022 एवं उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को वर्ष 2024 में बीपीएससी से चयनित शिक्षकों की तुलना में कम वेतन दिया जा रहा है। इनमें करीब 25 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2022 में हुई थी।
समान कार्य, समान जिम्मेदारी लेकिन वेतन में अंतर
समान कोटि और समान कार्य के बावजूद शिक्षकों के मूल वेतन में प्रतिमाह 1 हजार से 1.5 हजार रुपये तक तथा कुल मासिक वेतन में 2 हजार से 4 हजार रुपये तक का अंतर सामने आ रहा है। इससे वरिष्ठ शिक्षकों में गहरा असंतोष है।
मूल वेतन की वर्तमान स्थिति (प्रतिमाह)
कक्षा 1–5
पुराने शिक्षक: ₹25,750
नए शिक्षक: ₹26,520
कक्षा 6–8
पुराने शिक्षक: ₹28,840
नए शिक्षक: ₹29,700
कक्षा 9–10
पुराने शिक्षक: ₹31,930
नए शिक्षक: ₹32,890
कक्षा 11–12
पुराने शिक्षक: ₹32,960
नए शिक्षक: ₹33,950
टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने सौंपा मांग पत्र
टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ (TPSS बिहार) ने शिक्षा विभाग को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि छठे चरण (2022) में नियुक्त सभी विशेष शिक्षकों (कक्षा 1–5, 6–8 एवं 9–10) के वेतन में सुधार किया जाए और तीन वार्षिक वेतन वृद्धि जोड़ते हुए संशोधित मूल वेतन निर्धारित किया जाए।
संघ के अनुसार संशोधित न्यूनतम मूल वेतन इस प्रकार होना चाहिए—
कक्षा 1–5 : ₹27,320
कक्षा 6–8 : ₹30,600
कक्षा 9–10 : ₹33,880
1 जनवरी 2025 से एरियर भुगतान और सेवा पुस्तिका संशोधन की मांग
संघ ने स्पष्ट मांग की है कि संशोधित वेतनमान 01 जनवरी 2025 से प्रभावी किया जाए और उसी तिथि से एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही शिक्षकों की सेवा पुस्तिका (Service Book) में आवश्यक प्रविष्टियों का संशोधन कर छठे चरण 2022 के शिक्षकों के समूह स्तर पर वेतन विसंगति को पूर्ण रूप से समाप्त करने की मांग भी की गई है।

